भगवान वामन चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मृत्युंजय तिवारी के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक सदस्यों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया. मंच की ओर से मुख्यमंत्री को भगवान वामन का चित्र, अंग वस्त्र और गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया.
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आगमन पर मंच ने सौंपा चार सूत्री मांग पत्र
- वामन पंचकोसी कॉरिडोर, महोत्सव और पर्यटन विकास की उठी मांग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : मुख्यमंत्री के बक्सर आगमन के दौरान उस समय भगवान वामन चेतना मंच के कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई, जब मंदिर आंदोलन से जुड़े सदस्यों को ही मुख्य कार्यक्रम से दूर बैठा दिया गया. मंच के पदाधिकारियों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए खुलकर विरोध जताया. इसी बीच मंच की ओर से मुख्यमंत्री को चार सूत्री मांग पत्र भी सौंपा गया, जिसमें वामन पंचकोसी कॉरिडोर समेत कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल रहीं.
केंद्रीय कारा परिसर स्थित भगवान वामन मंदिर में मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की. इस दौरान भगवान वामन चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मृत्युंजय तिवारी के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक सदस्यों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया. मंच की ओर से मुख्यमंत्री को भगवान वामन का चित्र, अंग वस्त्र और गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया.
मंच के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांग पत्र में भगवान वामन मंदिर सहित संबंधित पौराणिक स्थलों को जोड़ते हुए “भगवान वामन पंचकोसी कॉरिडोर” के निर्माण की मांग की. साथ ही प्रतिवर्ष सरकारी स्तर पर तीन दिवसीय “भगवान वामन महोत्सव” आयोजित कराने, भगवान वामन की जन्मस्थली, सिद्धाश्रम और गंगा तट के सौंदर्यीकरण तथा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग भी रखी गई.
मंच के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष वामन द्वादशी पर भव्य रथयात्रा और देवोत्थान एकादशी पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं.
कार्यक्रम के बाद मंच के अध्यक्ष मृत्युंजय तिवारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिस मंच ने वामन मंदिर के निर्माण और इसे जेल परिसर से बाहर कराने के लिए वर्षों तक आंदोलन किया, उसी मंच के लोगों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूर रखा गया. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
वहीं, मंच के वरिष्ठ सदस्य नागेशदत्त पांडेय ने कहा कि मंदिर के अस्तित्व के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को मुख्य कार्यक्रम से अलग रखना स्थानीय प्रशासन की बड़ी चूक है और इससे कार्यकर्ताओं का अपमान हुआ है.
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