वीडियो : 106 साल पुराने अंग्रेजों के दौर के पुल पर मंडराया खतरा, रिसाव से चार प्रखंडों की सिंचाई व्यवस्था पर संकट ..

ग्रामीणों का कहना है कि उस दौर में पुलों और नहरों के निर्माण में गुणवत्ता और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता था. यही वजह है कि यह पुल एक सदी से अधिक समय गुजरने के बावजूद आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है.






                               


- अंग्रेजी शासन काल में हुआ था निर्माण
- जदयू नेता ने मौके पर पहुंच किया निरीक्षण अधिकारियों को वीडियो कॉलिंग से दिखाई समस्या

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : ब्रिटिश काल की इंजीनियरिंग की मजबूती और कुशलता की पहचान माना जाने वाला ठोरा नदी पर बना 106 वर्ष पुराना ऐतिहासिक पुल अब संकट के दौर से गुजर रहा है. नावानगर प्रखंड के सिकरौल लख नंबर-08 के दक्षिणी हिस्से में स्थित इस पुल से नहर का पानी लगातार रिस रहा है, जिससे इसकी संरचना कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि जिले के चार प्रखंडों की सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है.

क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार ठोरा नदी पर बने इस पुल का निर्माण वर्ष 1920-21 में अंग्रेजी शासन के दौरान सोन नहर प्रणाली के विस्तार और विकास के उद्देश्य से कराया गया था. उस समय डिहरी ऑन सोन से बक्सर तक नहर मार्ग से नावों द्वारा माल ढुलाई और आवागमन किया जाता था. ग्रामीणों का कहना है कि उस दौर में पुलों और नहरों के निर्माण में गुणवत्ता और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता था. यही वजह है कि यह पुल एक सदी से अधिक समय गुजरने के बावजूद आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है.

दरारों से रिस रहा पानी, दीवारों पर उग आए झाड़-झंखाड़

हालांकि अब इस ऐतिहासिक पुल की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है. पुल की दीवारों में कई जगह दरारें दिखाई दे रही हैं, जिनसे लगातार नहर का पानी रिस रहा है. दीवारों पर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और कई स्थानों पर ईंटें भी खिसकती नजर आ रही हैं. लगातार हो रहे जल रिसाव के कारण पुल की बुनियादी संरचना कमजोर होने की आशंका व्यक्त की जा रही है.

निरीक्षण के बाद सीनेट सदस्य ने विभाग को कराया अवगत

मामले की जानकारी मिलने के बाद जदयू के सीनेट सदस्य विनोद कुमार सिंह ने पुल स्थल का निरीक्षण किया और सोन कैनाल के कार्यपालक अभियंता धर्मेंद्र भारती से दूरभाष पर संपर्क कर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया. उन्हें वीडियो कॉलिंग से समस्या दिखाई. उन्होंने कहा कि यदि रिसाव को तत्काल नहीं रोका गया तो आने वाले समय में पुल को गंभीर क्षति पहुंच सकती है. उन्होंने विभाग से त्वरित जांच और मरम्मत की मांग भी की.

कहते हैं जिम्मेदार

मामले को गंभीर बताते हुए कार्यपालक अभियंता धर्मेंद्र भारती ने शीघ्र जांच और आवश्यक मरम्मत कार्य कराने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर निरीक्षण कर उचित कार्रवाई की जाएगी.

चार प्रखंडों की खेती पर पड़ सकता है सीधा असर

गौरतलब है कि बक्सर मुख्य नहर से नावानगर, डुमरांव, इटाढ़ी और बक्सर प्रखंड के हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है. ऐसे में यदि यह पुल क्षतिग्रस्त होता है तो इन क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था बाधित हो सकती है और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने तथा तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है.

गोलू मिश्र की रिपोर्ट 
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