कहा कि किसानों को आज भी जमीन का मुआवजा वर्ष 2013 के एमवीआर यानी मार्केट वैल्यू रेट के आधार पर दिया जा रहा है. बीते 13 वर्षों में मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन, महंगाई भत्ता और अन्य सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है
- खेत में जेसीबी उतरते ही भड़के किसान, पुलिस और वज्र वाहन की मौजूदगी से बढ़ा तनाव
- 2013 के एमवीआर रेट पर मुआवजा देने का आरोप, कमिश्नर स्तर के कैंप की मांग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के चौसा प्रखंड में एनएच-319 ए के निर्माण को लेकर किसानों का विरोध एक बार फिर उग्र रूप में सामने आया है. सड़क निर्माण के लिए जैसे ही किसानों के खेतों के पास जेसीबी मशीन पहुंची, वैसे ही बड़ी संख्या में किसान मौके पर जुट गए और काम को तत्काल रुकवा दिया. किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी जमीन का पूरा और वर्तमान दर पर मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक वे किसी भी हाल में सड़क निर्माण की अनुमति नहीं देंगे.
निर्माण कार्य रोके जाने की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ. दंगा नियंत्रण पुलिस वज्र वाहन के साथ मौके पर पहुंची, जिससे कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बक्सर के अपर भू-अर्जन पदाधिकारी कौसर इमाम मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों के सहयोग से ही निर्माण कार्य कराना चाहता है. हालांकि किसान जेसीबी मशीन को मौके से हटाने की मांग पर अड़े रहे, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरु नहीं हो सका.
मौके पर मौजूद किसान हीरामणि राय ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि किसानों को आज भी जमीन का मुआवजा वर्ष 2013 के एमवीआर यानी मार्केट वैल्यू रेट के आधार पर दिया जा रहा है. बीते 13 वर्षों में मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन, महंगाई भत्ता और अन्य सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन किसानों की जमीन के मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जो सरासर अन्याय है.
हीरामणि राय ने बताया कि उनकी जमीन न्यायपुर की है, जो नगर पालिका क्षेत्र में आती है. इसके बावजूद बिना सही किस्म निर्धारण और वर्गीकरण के ही मुआवजा तय किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन पुलिस बल के सहारे दबाव बनाकर किसानों की जमीन पर काम कराना चाहता है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
इस दौरान थर्मल पावर प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष सहित अन्य किसान नेता भी मौके पर पहुंचे. किसान नेताओं ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि एनएच-319 ए के निर्माण के नाम पर किसानों पर जबरन दबाव बनाया जा रहा है. उनकी मुख्य मांग है कि पहले किसानों के खातों में पूरा मुआवजा भुगतान किया जाए, उसके बाद ही उन्हें विश्वास में लेकर निर्माण कार्य शुरू हो.
किसान नेताओं ने बताया कि चौसा के किसान 17 अक्टूबर 2022 से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इस आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों पर मुकदमे दर्ज हुए, कई किसानों को जेल जाना पड़ा और कुछ किसान घायल भी हुए, लेकिन इसके बावजूद किसानों का हौसला नहीं टूटा. उन्होंने घोषणा की कि किसान प्रतिनिधिमंडल सोमवार को बक्सर के जिलाधिकारी से मिलकर मुआवजे की दर, किस्म निर्धारण और भुगतान प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट मांग रखेगा.
फिलहाल किसानों के विरोध के चलते चौसा में एनएच-319 ए का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है. अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.






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