बक्सर सड़क चौड़ीकरण में गुणवत्ता पर उठे सवाल, मानकों और डीएम के आदेश की अनदेखी से बढ़ा हादसे का खतरा ..

हाल ही में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी निर्माणाधीन सड़कों पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए. डीएम ने रिफ्लेक्टर लगाने, संकेतक और चेतावनी बोर्ड, साथ ही ‘कार्य प्रगति में है’ जैसे सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे. 







                                         


  • प्राक्कलन राशि का बोर्ड नहीं, पानी का छिड़काव भी बंद, निर्माण मानकों की खुलेआम अनदेखी
  • डीएम के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद न रिफ्लेक्टर लगे न सूचना बोर्ड, बाइक व ई-रिक्शा चालक हो रहे दुर्घटनाग्रस्त

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर क्षेत्र में गोलंबर से सिंडिकेट होते हुए ज्योति प्रकाश चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण का कार्य भले ही जारी हो, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और जिलाधिकारी के आदेशों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान न तो तय मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से लिया जा रहा है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

निर्माण स्थल पर अब तक प्राक्कलन राशि और कार्य विवरण से संबंधित बोर्ड नहीं लगाया गया है, जबकि यह कार्य की पारदर्शिता और निगरानी के लिए अनिवार्य होता है. इसके साथ ही सड़क निर्माण के दौरान उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है. इससे सड़क किनारे के दुकानदारों, पैदल राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी हो रही है. धूल के कारण दृश्यता कम हो रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ गई है.

गौरतलब है कि हाल ही में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी निर्माणाधीन सड़कों पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए. डीएम ने रिफ्लेक्टर लगाने, संकेतक और चेतावनी बोर्ड, साथ ही ‘कार्य प्रगति में है’ जैसे सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे. बावजूद इसके अब तक न तो रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं और न ही किसी तरह के सूचना या चेतावनी बोर्ड दिखाई दे रहे हैं, जो सीधे तौर पर जिलाधिकारी के आदेशों की अनदेखी को दर्शाता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण खासकर रात के समय बाइक सवार और ई-रिक्शा चालक सड़क की स्थिति को समझ नहीं पाते. कई जगह सड़क खुदी हुई है, कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं अचानक ऊंच-नीच बनी हुई है. ऐसे में संतुलन बिगड़ने से आए दिन दोपहिया वाहन और ई-रिक्शा दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं. लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो इन हादसों को रोका जा सकता था.

इस मामले में पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता जितेंद्र कुमार ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण कार्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने बताया कि संवेदक को स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं. जल्द ही प्राक्कलन राशि से संबंधित बोर्ड लगाया जाएगा और सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी कार्य, जैसे रिफ्लेक्टर, संकेतक और चेतावनी बोर्ड, तत्काल लगाए जाएंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है और जहां भी कमी पाई जाएगी, वहां तुरंत सुधार कराया जाएगा. विभाग का दावा है कि कार्य की गुणवत्ता और आम लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. इस परियोजना की प्राक्कलित राशि 41.5 करोड़ रुपये है. सड़क की कुल लंबाई तीन किलोमीटर निर्धारित है, जिसमें दोनों तरफ सात-सात मीटर चौड़ी सड़क, बीच में एक मीटर का डिवाइडर, दोनों ओर एक-एक मीटर का ड्रेन और ढाई-ढाई मीटर का शोल्डर बनाया जाना है. निर्माण कार्य 01 नवंबर 2026 तक पूरा किया जाना है. संवेदक हेमंत कुमार सिंह हैं.

स्थानीय लोगों की मांग है कि जब तक सड़क निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक न केवल निर्माण मानकों बल्कि जिलाधिकारी के आदेशों का भी सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके. अब देखना यह है कि विभागीय दावों के बाद जमीनी स्तर पर सुधार कब और कितना नजर आता है.







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