एक ही परिसर में दो गुनाह! अवैध अस्पताल–दवा दुकान पर ताला ..

बताया कि हाल के दिनों में बिना निबंधन चल रहे अस्पतालों और अवैध नर्सिंग होम्स में मरीजों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं. इसी को देखते हुए प्रशासन ने ऐसे संस्थानों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है.






                                         


– छापेमारी में एक्सपायरी दवाएं बरामद, अस्पताल और दवा दुकान सील
– अवैध नर्सिंग होम्स पर शिकंजा, एफआईआर की तैयारी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर के सिविल लाइंस मोहल्ले में मंगलवार को प्रशासन की कार्रवाई से हड़कंप मच गया, जब बिना निबंधन संचालित अस्पताल और दवा दुकान पर एक साथ छापेमारी कर दोनों परिसरों को सील कर दिया गया. कार्रवाई के दौरान दवा दुकान में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, वहीं अस्पताल का संचालन भी बिना वैध निबंधन के पाया गया. प्रशासन ने पूरे मामले में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

सदर अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी में सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी गौरव पांडेय, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, पुलिस बल और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम शामिल रही. जांच के दौरान दवा दुकान ओम मेडिकल के संचालक कोई भी वैध लाइसेंस या दवाओं से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. टीम को दुकान से बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं भी मिलीं, जो मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही हैं.

मामले में अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि हाल के दिनों में बिना निबंधन चल रहे अस्पतालों और अवैध नर्सिंग होम्स में मरीजों की मौत की घटनाएं सामने आई हैं. इसी को देखते हुए प्रशासन ने ऐसे संस्थानों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और लगातार कार्रवाई की जा रही है. इसी क्रम में सूचना मिली थी कि सिविल लाइंस मोहल्ले में बिना निबंधन दवा दुकान और अस्पताल संचालित हो रहे हैं.

जांच में सामने आया कि दवा दुकान का संचालन रंजन कुमार सिंह द्वारा किया जा रहा था, जो बिना किसी वैध लाइसेंस के था. इसके साथ ही उसी परिसर में एक अस्पताल भी बिना निबंधन संचालित पाया गया, जिसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया.

वहीं अस्पताल संचालक डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने अस्पताल के निबंधन के लिए स्वास्थ्य विभाग में आवेदन दिया हुआ है, लेकिन अब तक निबंधन प्राप्त नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बिहार सरकार के नियमों के अनुसार 40 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों को निबंधन नहीं दिया जाता. साथ ही उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में सप्ताह में एक दिन डॉ. कमलेश तिवारी भी सेवाएं देती हैं, ऐसे में अस्पताल को पूरी तरह अवैध कहना उचित नहीं है.

हालांकि प्रशासन का कहना है कि नियमों से ऊपर किसी को छूट नहीं दी जा सकती और मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी.







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