वीडियो : ट्रेन के इंजन में छिपाकर लाई जा रही शराब, तस्करी के खेल में रेलकर्मियों के मिलीभगत की आशंका गहराई ..

इंजन जैसे अत्यंत सुरक्षित और सीमित पहुंच वाले हिस्से से शराब मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि तस्करों को ट्रेन के तकनीकी ढांचे की जानकारी थी. बिना रेल कर्मियों की जानकारी या सहयोग के यहां तक शराब पहुंचाना आसान नहीं माना जा रहा है.






                                         



  • बक्सर स्टेशन पर बंद इंजन की तलाशी में शराब बरामद, बिना अंदरूनी मदद के मुश्किल मानी जा रही तस्करी
  • दिलदारनगर से बक्सर तक एक ही रेलखंड पर लगातार बरामदगी, रेल कर्मियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंजन से शराब बरामद होने के बाद शराब तस्करी के इस पूरे खेल ने नया मोड़ ले लिया है. अब इस अवैध धंधे में रेल कर्मियों की संभावित संलिप्तता को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है. लगातार एक ही रेलखंड पर सामने आ रही घटनाओं ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.

शनिवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय–पटना जंक्शन सवारी गाड़ी के बक्सर स्टेशन पहुंचते ही आरपीएफ को गुप्त सूचना मिली. इसके बाद प्रभारी निरीक्षक कुंदन कुमार के नेतृत्व में उप निरीक्षक विजेंद्र मुवाल तथा दिनेश चौधरी व टीम के द्वारा सुरक्षा बल के सहयोग से इंजन की गहन तलाशी ली गई. तलाशी के दौरान इंजन के भीतर बनाए गए खाली स्थान और उपकरणों के पास छुपाकर रखी गई शराब बरामद की गई. इंजन जैसे अत्यंत सुरक्षित और सीमित पहुंच वाले हिस्से से शराब मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि तस्करों को ट्रेन के तकनीकी ढांचे की जानकारी थी. बिना रेल कर्मियों की जानकारी या सहयोग के यहां तक शराब पहुंचाना आसान नहीं माना जा रहा है.

यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी इसी रेलखंड पर आरपीएफ को बड़ी सफलता मिल चुकी है. हाल ही में दिलदारनगर जंक्शन के आसपास एक ट्रेन की बोगी के चो में शराब छुपाकर ले जाने का मामला सामने आया था. वहीं, कुछ दिन पहले ब्रह्मपुत्र मेल डाउन के एसी कोच से भी बड़ी मात्रा में शराब बरामद की गई थी. लगातार हो रही इन बरामदगियों ने साफ कर दिया है कि तस्कर ट्रेनों को शराब ढुलाई का सुरक्षित माध्यम मान चुके हैं.

लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अब यह सवाल तेज हो गया है कि आखिर इंजन और बोगी जैसे हिस्सों तक शराब कैसे पहुंच रही है. रेलवे के अंदरूनी तंत्र की जानकारी और संभावित मिलीभगत के बिना इस तरह की तस्करी को अंजाम देना बेहद कठिन माना जा रहा है. ऐसे में रेलवे प्रशासन और आरपीएफ के सामने अब केवल बरामदगी ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क का खुलासा करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.







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