हाथों में तख्तियां और नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया. उनका कहना था कि संसद में आशा कार्यकर्ताओं के हित में कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन बजट में उनके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया.

नारेबाजी करती आशा कार्यकर्ता 

 





                               

  • आठ माह से बकाया भुगतान को लेकर गहराया आक्रोश, जीवनयापन पर संकट
  • मांगें नहीं मानी गईं तो पटना में निर्णायक आंदोलन की तैयारी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: सदर प्रखंड कार्यालय परिसर बुधवार को उस वक्त आंदोलन का केंद्र बन गया, जब आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों ने केंद्रीय बजट के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करते हुए उसकी प्रति जलाकर सरकार के प्रति अपना आक्रोश जताया. लंबे समय से लंबित मानदेय और बजट में उपेक्षा से नाराज कार्यकर्ताओं ने साफ संकेत दिया कि अब उनकी लड़ाई आर-पार की होगी.

अखिल भारतीय आशा फेडरेशन के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटीं. हाथों में तख्तियां और नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया. उनका कहना था कि संसद में आशा कार्यकर्ताओं के हित में कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन बजट में उनके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया, जिससे उनका भरोसा टूटता जा रहा है.

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी आर्थिक स्थिति की गंभीरता को भी सामने रखा. उन्होंने बताया कि पिछले आठ माह से मानदेय का भुगतान नहीं होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. हालांकि पूर्व में हुए आंदोलनों के बाद तीन माह का भुगतान किया गया, लेकिन अब भी पांच माह की राशि बकाया है. इससे उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना चुनौती बन चुका है.

जिला संयोजक सह राज्य उपाध्यक्ष अरुण कुमार ओझा ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो 11 और 12 अप्रैल को पटना में होने वाली कार्यशाला के दौरान बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी. उन्होंने सरकार के रवैये को मजदूर और महिला विरोधी बताते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया.

इस मौके पर चिकित्सा संघ के राज्य उपाध्यक्ष मनोज चौधरी समेत अन्य वक्ताओं ने भी कार्यकर्ताओं का समर्थन किया और उनकी मांगों को जायज बताया. कार्यक्रम में मीरा देवी, प्रेमशिला देवी, उर्मिला देवी, पुष्पा देवी, अर्चना श्रीवास्तव, सीमा देवी, नीतू कुमारी, कमला देवी, चिंता देवी, संतोषी देवी, अभिराजू देवी सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता और फैसिलिटेटर मौजूद रहीं.