कहा कि गैस पर बनने वाले व्यंजन जल्दी तैयार हो जाते थे, लेकिन लकड़ी के चूल्हे पर वही व्यंजन बनाने में अधिक समय लगता है. इसी कारण कई आइटम्स को फिलहाल मेनू से हटा दिया गया है.
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| लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते रेस्टोरेंट के रसोइया |
- कोयला और लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर संचालक, बढ़ी लागत और समय
- प्रशासन के दावों के बीच कमर्शियल गैस की किल्लत, उपभोक्ताओं ने एजेंसियों पर लगाए आरोप
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले में रसोई गैस संकट का असर अब साफ तौर पर रेस्टोरेंट व्यवसाय पर दिखाई देने लगा है. गैस की कमी के कारण शहर के कई रेस्टोरेंटों का मेनू बदल गया है, जिससे ग्राहकों को उनके पसंदीदा व्यंजन नहीं मिल पा रहे हैं. संचालकों का कहना है कि गैस पर आसानी से बनने वाले कई व्यंजन अब कोयला और लकड़ी के चूल्हे पर बनाना संभव नहीं है, इसलिए उन्हें मेनू से हटाना पड़ा है.
देशभर में जारी गैस संकट का असर बक्सर में भी महसूस किया जा रहा है. प्रशासन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि घरेलू रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने की बात भी स्वीकार की जा रही है. इसका सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट संचालकों पर पड़ रहा है, जिन्हें गैस नहीं मिलने के कारण वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है.
चरित्रवन कॉलेज गेट के समीप स्थित "वेज तड़का रेस्टोरेंट" के संचालक गोलू गोसाईं ने बताया कि उनके यहां अब लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि गैस पर बनने वाले व्यंजन जल्दी तैयार हो जाते थे, लेकिन लकड़ी के चूल्हे पर वही व्यंजन बनाने में अधिक समय लगता है. इसी कारण कई आइटम्स को फिलहाल मेनू से हटा दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि गैस संकट लंबा खिंचता है तो अन्य वैकल्पिक ईंधनों पर भी विचार किया जाएगा.
वहीं पाहवा रेस्टोरेंट के संचालक राजा पाहवा ने बताया कि उनके यहां भी गैस के स्थान पर कोयले के चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कोयले पर खाना बनाना गैस की तुलना में अधिक कठिन है और इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ रही है. पहले जहां प्रतिदिन तीन कमर्शियल गैस सिलेंडर में काम चल जाता था, वहीं अब रोजाना करीब डेढ़ क्विंटल कोयले की खपत हो रही है, जिससे लागत में भी इजाफा हुआ है.
शहर के एक अन्य रेस्टोरेंट संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गैस की कमी के कारण डोसा, फ्राइड राइस जैसे व्यंजन बनाना मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि प्रशासन के दावे और जमीनी हकीकत में काफी अंतर नजर आ रहा है.
मनमाना व्यवहार कर रहे हैं गैस एजेंसी संचालक
इधर, गैस एजेंसी संचालकों पर भी मनमानी के आरोप लग रहे हैं. कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना बुकिंग के ही सिलेंडर को डिलीवर दिखा दिया जाता है. वहीं कुछ उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि केवाईसी अपडेट नहीं होने का बहाना बनाकर उन्हें गैस नहीं दी जा रही है, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि केवाईसी प्रक्रिया पूरी करते हुए गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.
बहरहाल, गैस संकट ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यवसायियों की भी परेशानी बढ़ा दी है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह संकट कब समाप्त होगा और कमर्शियल गैस की आपूर्ति कब तक सामान्य हो पाएगी. तब तक बक्सर के लोगों को बदले हुए मेनू के साथ ही संतोष करना पड़ेगा.






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