चुनाव संपन्न होने के बाद जारी की गई जिला अध्यक्षों की सूची में बक्सर का नाम शामिल नहीं होना नई चर्चाओं को हवा दे रहा है. माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है.
- डेलिगेट विवाद के बीच बक्सर का नाम सूची से गायब, पहले सवाल फिर जिलाध्यक्ष का जवाब
- जदयू जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह बोले — आरोप बेबुनियाद, प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर: जदयू बक्सर में जिला अध्यक्षीय चुनाव को लेकर उठा विवाद अब और गहरा गया है. एक ओर डेलिगेट चयन पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर चुनाव संपन्न हो जाने के बाद जारी जिला अध्यक्षों की सूची में अब तक बक्सर का उल्लेख नहीं किया गया है. इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है.
सबसे पहले विवाद उन आठ नामों को लेकर शुरू हुआ — कमला यादव, संजय यादव, अक्षय लाल रावत, धीरज कुमार, हरिराम यादव, वीरेंद्र यादव, संतोष यादव और गौरी शंकर यादव — जिन्हें डेलिगेट बनाया गया था. आरोप है कि ये सभी राष्ट्रीय जनता दल की जिला कार्यसमिति में सूचीबद्ध रहे हैं. जानकारी सामने आने के बाद राजद द्वारा संबंधित लोगों को निलंबित किए जाने की चर्चा ने मामले को और तूल दे दिया.
इसके बाद जिला अध्यक्ष से सीधे सवाल पूछे गए. क्या डेलिगेट चयन से पहले संबंधित व्यक्तियों की राजनीतिक पृष्ठभूमि की जांच की गई थी. यदि जांच हुई थी तो ऐसे नाम सूची में कैसे शामिल हुए, और यदि नहीं हुई तो क्या यह गंभीर संगठनात्मक लापरवाही है.
दूसरा प्रश्न प्रदेश नेतृत्व की जानकारी को लेकर उठा — क्या इन नामों की पूर्व राजनीतिक संबद्धता की सूचना प्रदेश स्तर पर दी गई थी. यदि दी गई थी तो क्या उसकी लिखित स्वीकृति थी, और यदि नहीं दी गई तो क्या यह निर्णय व्यक्तिगत स्तर पर लिया गया.
तीसरा सवाल यह कि क्या दूसरे दल की कार्यसमिति से जुड़े लोग जदयू की आंतरिक चुनाव प्रक्रिया में महज संयोग से आए या इसके पीछे कोई रणनीति थी.
चौथा और अहम प्रश्न यह कि वर्षों से एक ही नेतृत्व का बने रहना संगठनात्मक मजबूती का परिणाम है या फिर किसी “मैनेजमेंट मॉडल” का हिस्सा.
इसी बीच चुनाव संपन्न होने के बाद जारी की गई जिला अध्यक्षों की सूची में बक्सर का नाम शामिल नहीं होना नई चर्चाओं को हवा दे रहा है. माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. सूत्रों का दावा है कि दोबारा चुनाव कराए जाने की प्रबल संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
इन सभी सवालों के बीच जदयू जिलाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा कि डेलिगेट को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह पूरी तरह बेबुनियाद है. कमला यादव को सदस्य बनाया जा रहा है और वे पहले से ही जदयू में सक्रिय हैं तथा कई कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं.
जिलाध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि राजद संगठन की अंदरूनी बातें आखिर बाहर कैसे आ रही हैं. उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि संगठन की प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक और पारदर्शी है.
फिलहाल बक्सर की राजनीति में यह मुद्दा केंद्र में है. कार्यकर्ता पारदर्शिता और स्पष्टता की मांग कर रहे हैं, जबकि जिलाध्यक्ष आरोपों को निराधार बता रहे हैं. अब सबकी नजरें शीर्ष नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं.




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