स्पष्ट किया कि लोक अदालत में मामलों की सुनवाई और निष्पादन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है. इससे लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है और समय व पैसे दोनों की बचत होती है.
मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार काजल झांब ने बताया कि इस लोक अदालत में करीब 5 हजार मामलों के निष्पादन का लक्ष्य रखा गया है. इसमें बैंक ऋण, बिजली बिल, इंश्योरेंस, मारपीट, बंटवारा और सड़क दुर्घटना जैसे सुलहनीय मामलों को आपसी सहमति के आधार पर निपटाया जाएगा.
उन्होंने बताया कि इस बार विशेष रूप से परिवहन चालान से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है. ऐसे मामलों में लोगों को चालान की राशि में 50 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी, जिससे आम लोगों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है.
काजल झांब ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत एक ऐसा मंच है, जहां न किसी की हार होती है और न ही किसी की जीत, बल्कि आपसी समझौते से मामलों का स्थायी समाधान किया जाता है. लोक अदालत में निपटाए गए मामलों में आगे किसी प्रकार की अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे विवाद का पूरी तरह अंत हो जाता है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोक अदालत में मामलों की सुनवाई और निष्पादन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है. इससे लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है और समय व पैसे दोनों की बचत होती है.
बताते चलें कि इससे पहले 14 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1708 मामलों का निष्पादन सुलह-समझौते के आधार पर किया गया था. इस बार भी बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है.
मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे. वहीं, आम जनता से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस लोक अदालत का लाभ उठाकर अपने लंबित मामलों का सरल तरीके से समाधान कराएं.






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