अवैध हिरासत पर कोर्ट सख्त, थानाध्यक्ष व जांच पदाधिकारी से स्पष्टीकरण तलब ..

पुलिस रिकॉर्ड में उनकी गिरफ्तारी 28 अप्रैल को दर्शाई गई है. अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत मानते हुए गंभीर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी नियमों का पालन अनिवार्य है.






                               


 
  • गिरफ्तारी प्रक्रिया में लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
  • दो आरोपियों को राहत, अगली सुनवाई 14 मई को तय

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पॉक्सो एक्ट के एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अवैध हिरासत के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है. विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अमित कुमार शर्मा की अदालत ने पाया कि आरोपियों को कानूनन प्रक्रिया का पालन किए बिना थाने में रखा गया, जिस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा.

सुनवाई के दौरान आरोपी अलीम हाशमी और तबिस अली ने अदालत को बताया कि उन्हें 26 अप्रैल से ही थाने में रखा गया था, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में उनकी गिरफ्तारी 28 अप्रैल को दर्शाई गई है. अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत मानते हुए गंभीर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी नियमों का पालन अनिवार्य है.

रिमांड खारिज, आरोपियों को मिली राहत

अदालत ने दोनों आरोपियों को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश देते हुए पुलिस द्वारा दायर रिमांड आवेदन को खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में लगाए गए आरोप ऐसे नहीं हैं, जिनमें सात वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान हो, इसके बावजूद गिरफ्तारी में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया.

साक्ष्यों की कमी पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़िता का बयान अब तक दर्ज नहीं किया गया है. शिकायत में जिन मोबाइल संदेशों का जिक्र किया गया था, उनके स्क्रीनशॉट भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए. केस डायरी में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव को देखते हुए अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए.

पुलिस अधिकारियों को नोटिस, अगली सुनवाई तय

अदालत ने ब्रह्मपुर थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार और जांच पदाधिकारी विनोद कुमार यादव से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है. दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि Arnesh Kumar vs State of Bihar के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया, गिरफ्तारी की सही तारीख क्यों छिपाई गई और अवैध हिरासत के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए.

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि विभागीय जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. इस मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को निर्धारित की गई है.













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