बरामद शराब की बोतलें जांच में ‘नॉन-अल्कोहलिक’ पाई गई हैं. इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और अब यह ‘शराब कांड’ से ज्यादा एक रहस्यमयी साजिश जैसा नजर आने लगा है.
- छापेमारी से हाई-वोल्टेज ड्रामे तक, 24 घंटे में पलटी पूरी कहानी
- सुरक्षाकर्मी हिरासत से रिहा, अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल — आखिर बोतलें वहां पहुंचीं कैसे?
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिला परिवहन कार्यालय (DTO Office) परिसर से कथित शराब बरामदगी के मामले में शुक्रवार को ऐसा ट्विस्ट आया जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे को सकते में डाल दिया. गुरुवार को जिस मामले को लेकर पुलिस और उत्पाद विभाग ने बड़ी कार्रवाई का दावा किया था, उसी मामले की जांच में अब चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. कार्यालय परिसर के गार्ड रूम के पास किचन से बरामद शराब की बोतलें जांच में ‘नॉन-अल्कोहलिक’ पाई गई हैं. इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और अब यह ‘शराब कांड’ से ज्यादा एक रहस्यमयी साजिश जैसा नजर आने लगा है.
पुलिस की कार्रवाई के बाद मचा था हड़कंप
गुरुवार को गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने DTO कार्यालय परिसर में छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान नीचे बने गार्ड रूम और उससे सटे किचन से बड़ी संख्या में बोतलें बरामद हुई थीं. बोतलों की पैकिंग और बनावट देखकर शुरुआती तौर पर अधिकारियों ने इसे विदेशी शराब मान लिया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए कमरे को तत्काल सील कर दिया गया और चार सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लेकर नगर थाना लाया गया था.
इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैल गई थी. शराबबंदी वाले बिहार में सरकारी कार्यालय परिसर से कथित शराब बरामद होने की खबर तेजी से चर्चा का विषय बन गई थी.
सील कमरे का ताला खुला तो बदल गई पूरी कहानी
शुक्रवार को मजिस्ट्रेट और जांच अधिकारियों की मौजूदगी में सील कमरे का ताला खोला गया. इसके बाद जब बोतलों की बारीकी से जांच की गई तो पूरा मामला उलट गया. अधिकारियों ने पाया कि सात प्रमुख बोतलों पर स्पष्ट रूप से ‘Non-Alcoholic’ लिखा हुआ था. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि उनमें अल्कोहल की मात्रा नहीं थी.
यही वह क्षण था जब पूरा मामला अचानक ‘महा-ट्विस्ट’ में बदल गया. जिस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताया जा रहा था, वह अब सवालों के घेरे में आ गई है.
SDPO ने कहा — अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज
सदर SDPO गौरव पांडेय ने बताया कि पूरे मामले को लेकर नगर थाना में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है.
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि हिरासत में लिए गए सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ अब तक कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है. पूछताछ के बाद गार्ड सूरज और निशांत समेत चारों सुरक्षाकर्मियों को छोड़ दिया गया.
अब सबसे बड़ा सवाल — आखिर ‘नॉन-अल्कोहलिक’ बोतलें वहां पहुंचीं कैसे?
मामले में कानूनी स्थिति भले बदल गई हो, लेकिन रहस्य अब और गहरा गया है. शहर में अब कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं. अगर बोतलें सिर्फ नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक थीं, तो उन्हें सरकारी कार्यालय के किचन में छिपाकर क्यों रखा गया था? क्या किसी ने परिवहन कार्यालय को बदनाम करने की साजिश रची? या फिर पूरे घटनाक्रम के पीछे कोई अंदरूनी खेल है?
CCTV फुटेज खंगालने की तैयारी में पुलिस
सूत्रों के अनुसार पुलिस अब कार्यालय परिसर के CCTV फुटेज खंगालने की तैयारी में है. इसके अलावा दफ्तर के कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर इस पूरे ‘फ्लॉप शो’ की पटकथा किसने लिखी.
फिलहाल, DTO ऑफिस का यह हाई-प्रोफाइल मामला बक्सर में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है और लोग अब इस रहस्य से पर्दा उठने का इंतजार कर रहे हैं.






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