वीडियो : बक्सर DTO ऑफिस में दारू का 'डबल स्टैंडर्ड'? पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी का सिस्टम पर बड़ा हमला, कहा- 'राजा हो या रंक, कानून सबके लिए एक' ..

कहा कि डीटीओ ऑफिस में सीसीटीवी कैमरे क्या सिर्फ शो-पीस के लिए लगे हैं? उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज निकाली जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके कि आखिर इस सरकारी दफ्तर को 'मयखाना' बनाने कौन आया था?


 





                               

बक्सर DTO ऑफिस में दारू का 'डबल स्टैंडर्ड'? पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी का सिस्टम पर बड़ा हमला, कहा- 'राजा हो या रंक, कानून सबके लिए एक'

- पूर्व विधायक ने कहा - रसोई से लेकर अलमारी तक... सरकारी दफ्तर में 'मधुशाला'!

- प्रशासनिक भागों में पर सवाल उठते हुए विधायक ने की प्रेस वार्ता 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर बड़ा सियासी बवंडर खड़ा हो गया है. इस बार निशाना बना है बक्सर का डीटीओ (परिवहन विभाग) कार्यालय, जहां से भारी मात्रा में शराब और खाली बोतलें बरामद हुई हैं. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद बक्सर के पूर्व विधायक संजय कुमार उर्फ मुन्ना तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए पूरे मामले पर "लीपापोती" की जा रही है.

पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी ने मीडिया के सामने तीखे सवाल दागते हुए कहा कि उन्हें सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पता चला कि बीते 13-14 तारीख को डीटीओ कार्यालय के किचन, अलमारी और गार्ड रूम से शराब की भरी और खाली बोतलें मिली हैं.

मुन्ना तिवारी ने बिफरते हुए कहा, "अगर किसी गरीब या मध्यमवर्गीय व्यक्ति के घर या खेत से शराब की एक बोतल भी मिल जाए, तो पुलिस उसे तुरंत तस्कर बताकर जेल भेज देती है. लेकिन जब सरकारी महकमे के भीतर शराब का खेल चल रहा है, तो कार्रवाई के नाम पर सांप सूंघ गया है. कानून दो तरह का नहीं हो सकता—चाहे राजा हो या रंक, सब पर एक जैसी कार्रवाई होनी चाहिए."

'अज्ञात' का बहाना और गायब FIR की कॉपी

इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पूर्व विधायक ने पुलिस से एफआईआर (FIR) की कॉपी मांगी. उन्होंने आरोप लगाया कि थाने के कर्मचारियों ने उन्हें एफआईआर की कॉपी देने से साफ मना कर दिया, जिससे दाल में कुछ काला होने का शक और गहरा जाता है.

प्रशासन के इस तर्क पर कि 'किसी अज्ञात व्यक्ति ने वहां शराब रख दी होगी', मुन्ना तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि डीटीओ ऑफिस में सीसीटीवी कैमरे क्या सिर्फ शो-पीस के लिए लगे हैं? उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज निकाली जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके कि आखिर इस सरकारी दफ्तर को 'मयखाना' बनाने कौन आया था.

जब अपनी ही गाड़ी की नीलामी का दिया हवाला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व विधायक ने एसपी शुभम आर्य से हुई बातचीत का भी खुलासा किया. जब उन्होंने सवाल किया कि जिस कमरे से शराब मिली, उसे सील क्यों नहीं किया गया? तो जवाब मिला—'सरकारी कार्यालय सील नहीं होते.'

इस पर मुन्ना तिवारी ने अपनी ही एक पुरानी घटना का उदाहरण देते हुए सिस्टम को घेरा. उन्होंने कहा, "जब मैं विधायक था और मेरी गाड़ी से शराब बरामदगी की बात आई, तो एक जनप्रतिनिधि की गाड़ी को सील करके नीलाम कर दिया गया. जब कानूनन गाड़ी नीलाम हो सकती है, तो सरकारी दफ्तर का वह कमरा सील क्यों नहीं हो सकता? कमरा खुला रखना साफ तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश है."

DTO पर 'नजराना' और भ्रष्टाचार का भी आरोप

पूर्व विधायक यहीं नहीं रुके. उन्होंने वर्तमान परिवहन पदाधिकारी (राजकुमार प्रसाद) पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप मढ़ दिया. उन्होंने कहा कि ट्रैक्टरों से ₹3,000 और ट्रकों से ₹14,000 से ₹15,000 की अवैध वसूली (नजराना) की जा रही है. मुन्ना तिवारी ने तीखे लहजे में पूछा कि क्या यह अवैध वसूली शराब के नशे में धुत होकर की जा रही है, इसकी भी जांच होनी चाहिए.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से न्याय की उम्मीद, आंदोलन की चेतावनी

इस पूरे मामले को लेकर पूर्व विधायक ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक औपचारिक पत्र लिखकर मेल किया है. उन्होंने कहा, "मैं 10 साल सम्राट चौधरी जी के साथ सदन में काम कर चुका हूँ. वह अपनी कड़क कार्यशैली और कठोर फैसलों के लिए जाने जाते हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि मेरा पत्र मिलते ही वह इस पर कड़ा एक्शन लेंगे."

अंत में उन्होंने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर इस मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और बक्सर की सड़कों पर उतरकर एक बड़ा जन-आंदोलन छेड़ेंगे.

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