गो-धन और गौशाला की भूमि पर अवैध कब्जा करना अत्यंत महापाप : प्रेमाचार्य

महाराज ने सृष्टि वर्णन, विदुर-मैत्रेय संवाद, सती चरित्र, शिव विवाह और ध्रुव चरित्र जैसे प्रेरक प्रसंगों को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए कहा कि गौ सेवा से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं है. 


 





                               





  • सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र और शिव विवाह के प्रसंगों से मिली प्रेरणा 
  • प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज बोले—गौ सेवा सर्वोच्च धर्म, भक्ति ही जीवन का परम सत्य

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सुविधा मेडिकल एजेंसी, नियर बस स्टैंड परिसर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां कथा वाचन के दौरान गौ सेवा, भक्ति और धर्म के गूढ़ रहस्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया. कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया.

परम पूज्य प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने सृष्टि वर्णन, विदुर-मैत्रेय संवाद, सती चरित्र, शिव विवाह और ध्रुव चरित्र जैसे प्रेरक प्रसंगों को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए कहा कि गौ सेवा से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गो-धन और गौशाला की भूमि पर अवैध कब्जा करना अत्यंत महापाप है, जो देव-द्रव्य के हरण के समान माना गया है.

महाराज जी ने गौ महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गौ माता के प्रत्येक अंग में देवी-देवताओं का निवास होता है और इसी कारण उन्हें ‘विश्व की माता’ कहा गया है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो व्यक्ति गाय के नाम पर एकत्र धन का दुरुपयोग करता है या गौ-भूमि हड़पता है, उसे कठोर दैवी दंड भुगतना पड़ता है. शास्त्रों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति को हजारों वर्षों तक नरक में यातना सहनी पड़ती है.

कथा के दौरान ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मात्र पांच वर्ष की आयु में ध्रुव ने अपने दृढ़ संकल्प और सच्ची भक्ति से भगवान को प्राप्त किया. यह प्रसंग यह संदेश देता है कि भगवान तक पहुंचने के लिए उम्र नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और अटल विश्वास की आवश्यकता होती है.

उन्होंने कहा कि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं और सच्चे भक्त की भावना से प्रसन्न होते हैं. भगवान श्रीकृष्ण द्वारा विदुर के घर जाकर प्रेमपूर्वक केले के छिलके खाने का प्रसंग इसका श्रेष्ठ उदाहरण है. उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम क्षण में भी यदि सच्चे मन से भगवान का नाम लिया जाए, तो पापी का भी उद्धार संभव है.

कथा का सार बताते हुए महाराज जी ने कहा कि संसार के सभी सुख क्षणभंगुर हैं और केवल भगवान की भक्ति ही जीवन का शाश्वत सत्य है. श्रीमद्भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग मनुष्य को इसी सत्य की ओर अग्रसर करता है.

इस अवसर पर मुख्य यजमान आशुतोष मिश्रा, रेणु मिश्रा, आदित्य कुमार मिश्रा, अतुल कुमार मिश्रा सहित समस्त मिश्रा परिवार एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.














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