कुल 2,68,000 पेड़ लगाने का दायित्व सौंपा गया है. इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक चरणबद्ध कार्यक्रम तैयार किया गया है. इसी कड़ी में, चालू ग्रीष्मकालीन सत्र के दौरान प्रबंधन द्वारा 36,500 पौधे लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है.
- चौसा थर्मल पावर प्लांट के आसपास विकसित होगी हरित पट्टी, 2.68 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
- विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रशासन सक्रिय, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु बदलाव पर हुआ मंथन
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बक्सर जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक कार्ययोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है. लंबे समय से प्रतीक्षित चौसा स्थित थर्मल पावर प्लांट के आसपास 'हरित पट्टी' (Green Belt) विकसित करने की योजना पर अब काम शुरू हो गया है. जिलाधिकारी साहिला ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने कमर कस ली है.
चौसा थर्मल पावर प्लांट की स्थापना के समय ही यह अनिवार्य शर्त थी कि संयंत्र के आसपास के क्षेत्रों में हरित पट्टी विकसित की जाएगी. हालांकि, किन्हीं कारणों से यह कार्य अब तक अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया था, लेकिन विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर इसका विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है.
जिलाधिकारी साहिला ने बताया कि पावर प्लांट प्रबंधन को कुल 2,68,000 पेड़ लगाने का दायित्व सौंपा गया है. इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक चरणबद्ध कार्यक्रम तैयार किया गया है. इसी कड़ी में, चालू ग्रीष्मकालीन सत्र के दौरान प्रबंधन द्वारा 36,500 पौधे लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है. यह संपूर्ण वृक्षारोपण अभियान वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए चलाया जा रहा है ताकि लगाए गए पौधों का सही ढंग से रख-रखाव सुनिश्चित हो सके और उनकी उत्तरजीविता दर (Survival Rate) अधिक रहे.
डुमरांव एग्रीकल्चर कॉलेज में मंथन
पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में प्रशासन द्वारा दूसरा प्रमुख कार्यक्रम डुमरांव स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज में आयोजित किया गया. 'नमामि गंगे' परियोजना के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज के विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया.
इस दौरान मुख्य रूप से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण में हो रहे बदलाव और हाल के वर्षों में बढ़ी 'हीट वेव' (लू) जैसी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई. विशेषज्ञों और प्रशासन ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर इस बात पर मंथन किया कि कैसे वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. विशेष रूप से कृषि क्षेत्र की इसमें क्या भूमिका हो सकती है, इस पर विस्तार से चर्चा की गई. पर्यावरण अनुकूल खेती और सतत विकास के तरीकों को अपनाने पर जोर दिया गया, ताकि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके.
भविष्य की राह: पर्यावरण के प्रति जागरूकता
जिलाधिकारी ने कहा कि केवल पौधारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वे पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें. उन्होंने उम्मीद जताई कि चौसा में शुरू हुआ यह अभियान न केवल औद्योगिक क्षेत्र के आसपास हरियाली लाएगा, बल्कि पूरे बक्सर जिले के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा.
विश्व पर्यावरण दिवस के इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास और पर्यावरण का संतुलन ही आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित भविष्य की गारंटी है.
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