लुंबिनी से लहराया तिरंगा, बिहार की बेटी पंचरत्ना कुमारी बनीं स्वर्ण विजेता ..

एक के बाद एक कठिन और रोमांचक मुकाबलों में पंचरत्ना कुमारी ने अपनी तकनीकी कुशलता, जबरदस्त फिटनेस, अनुशासन और अदम्य साहस का परिचय दिया. फाइनल मुकाबले में निर्णायक जीत के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया.







                                         




  • नेपाल में साउथ एशिया कॉम्बैट कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में 75 किलो वर्ग में ऐतिहासिक जीत
  • मजदूर पिता की बेटी ने मेहनत और हौसले से रचा अंतरराष्ट्रीय इतिहास

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नेपाल के ऐतिहासिक नगर लुंबिनी में उस वक्त भारत का तिरंगा गर्व से लहराया, जब बिहार पुलिस के नालंदा जिला बल में कार्यरत महिला सिपाही पंचरत्ना कुमारी (बैच 14–15) ने साउथ एशिया कॉम्बैट कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. 75 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरे बिहार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया.


इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में साउथ एशिया के आठ देशों की महिला पहलवानों ने हिस्सा लिया. एक के बाद एक कठिन और रोमांचक मुकाबलों में पंचरत्ना कुमारी ने अपनी तकनीकी कुशलता, जबरदस्त फिटनेस, अनुशासन और अदम्य साहस का परिचय दिया. फाइनल मुकाबले में निर्णायक जीत के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जिसने वहां मौजूद हर दर्शक को भावुक कर दिया.

समापन समारोह में नेपाल सरकार के खेल मंत्री संतोष पांडे ने पंचरत्ना कुमारी को स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. इस दौरान विभिन्न देशों के खेल पदाधिकारी, प्रशिक्षक और खिलाड़ी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने.

इस उपलब्धि पर पूर्व जिला पार्षद डॉ. मनोज कुमार यादव ने कहा कि पंचरत्ना कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहरा सकती हैं. यह सफलता बिहार पुलिस और पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी.

चौसा नगर पंचायत की मुख्य पार्षद किरण देवी ने कहा कि साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतना असाधारण उपलब्धि है. पंचरत्ना कुमारी ने यह संदेश दिया है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं.

गौरतलब है कि पंचरत्ना कुमारी ग्राम तियारा, पोस्ट मनोहरपुर, थाना राजपुर, जिला बक्सर की निवासी हैं. उनके पिता राधेश्याम प्रसाद मजदूर हैं और माता सरस्वती बौद्ध गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों, संघर्ष और कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा और आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गईं.

उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर बुद्धिजीवी विकास मंच के संयोजक प्रोफेसर रमेश चंद्र श्रीवास्तव, रामाशीष कुशवाहा, वॉर्ड पार्षद चंदन चौधरी, विनोद कुमार यादव, जीतेंद्र यादव, शमीम साईं, भुवर राइन, भरत पाण्डेय, विजय राम और दिलबहार चौधरी सहित कई गणमान्य लोगों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.







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