शिक्षकों का बकाया वेतन नहीं देने पर डीइओ समेत वरीय अधिकारियों पर गिरफ्तारी वारंट ..

कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए 15 अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. वारंट केवल जिला शिक्षा पदाधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के अन्य वरीय अधिकारियों के विरुद्ध भी जारी किया गया है.





                               



  • तीन वर्षों तक समन की अनदेखी, न्यायालय ने अपनाया सख्त रुख
  • पहले 50 हजार रुपये जुर्माना, अब वारंट से विभाग में हड़कंप

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बुनियादी विद्यालयों के शिक्षकों का बकाया वेतन भुगतान नहीं करने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी समेत शिक्षा विभाग के कई वरीय अधिकारियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है. लगातार आदेशों की अनदेखी पर कोर्ट ने यह कार्रवाई की है.

जिले का शिक्षा विभाग इन दिनों गंभीर आरोपों और न्यायिक कार्रवाई को लेकर चर्चा में है. केस संख्या 08/2022 (विक्रमादित्य एवं अन्य बनाम राज्य सरकार) में सुनवाई करते हुए सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रथम के न्यायालय ने यह सख्त आदेश दिया.

मामला बुनियादी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान से जुड़ा है. न्यायालय ने इस संबंध में 20 मार्च 2023 को ही संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया था. इसके बावजूद विभाग के अधिकारियों ने करीब तीन वर्षों तक समन और नोटिस को नजरअंदाज किया.

बार-बार अवसर दिए जाने के बाद भी जब न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए 15 अप्रैल 2026 को गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. वारंट केवल जिला शिक्षा पदाधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के अन्य वरीय अधिकारियों के विरुद्ध भी जारी किया गया है.

मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को निर्धारित है, जिसमें संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

इधर, जिला अपीलीय प्राधिकार के पीठासीन पदाधिकारी अजय कुमार पाण्डेय ने भी जिला शिक्षा पदाधिकारी पर सख्ती दिखाते हुए दो अलग-अलग मामलों में 25-25 हजार रुपये, कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई न्यायिक आदेशों की अवहेलना और कर्तव्यहीनता के आरोप में की गई है.

सूत्रों के अनुसार, वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन फिलहाल अवकाश पर हैं. लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.













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