पटना किसान संसद में गूंजेगी बक्सर की आवाज, चौसा थर्मल मुद्दे पर बड़ा फैसला संभव ..

सैकड़ों किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है. इस दौरान चौसा थर्मल परियोजना से प्रभावित किसानों के रोजगार, प्रदूषण और अन्य समस्याओं को लेकर बड़ा निर्णय लिए जाने के संकेत दिए गए हैं.
बैठक करते किसान





                               


  • 9 अप्रैल को सैकड़ों किसान होंगे शामिल, रोजगार और प्रदूषण के मुद्दे पर बनेगी रणनीति
  • किसान चौपाल में केंद्र के विधेयकों और मुक्त व्यापार समझौते पर भी हुई तीखी चर्चा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार के आह्वान पर 9 अप्रैल 2026 को पटना में आयोजित किसान संसद में बक्सर से सैकड़ों किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है. इस दौरान चौसा थर्मल परियोजना से प्रभावित किसानों के रोजगार, प्रदूषण और अन्य समस्याओं को लेकर बड़ा निर्णय लिए जाने के संकेत दिए गए हैं.

बनारपुर पंचायत भवन में प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा द्वारा आयोजित किसान चौपाल में इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. चौपाल में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि चौसा थर्मल परियोजना में प्रभावित परिवारों के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में धांधली की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

कार्यक्रम में भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित बीज विधेयक, बिजली बिल विधेयक, कीटनाशक विधेयक तथा अमेरिका के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताते हुए इन पर भी गंभीर चिंता जताई गई. वक्ताओं ने कहा कि इन नीतियों का सीधा असर देश के छोटे और मध्यम किसानों पर पड़ेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है.

किसान चौपाल को भारतीय किसान यूनियन बिहार-झारखंड के प्रभारी दिनेश कुमार, बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह समेत कई किसान नेताओं ने संबोधित किया. उन्होंने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया.

किसान नेताओं ने बताया कि 9 अप्रैल को पटना के आईएमए हॉल में आयोजित किसान संसद में बक्सर से प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा के सैकड़ों सदस्य शामिल होंगे. इस बैठक में चौसा थर्मल परियोजना में स्थानीय लोगों को रोजगार देने, पौनी की समस्या के समाधान और प्रदूषण के मुद्दे पर कंपनी के खिलाफ घेराव की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है.

कार्यक्रम में बृजेश राय, नंदलाल सिंह, अश्विनी कुमार चौबे, रामप्रवेश सिंह, शैलेश राय, शिवजी सिंह, विजय कुमार राय सहित अन्य किसानों ने भी अपने विचार रखे.













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