ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी / यूजीसी रेगुलेशन–समता आंदोलन, बक्सर के तत्वावधान में हुए इस आयोजन ने यह संकेत दिया कि समाज के विभिन्न वर्ग अब अपने अधिकारों को लेकर अधिक सजग और मुखर हो रहे हैं.





                               


  • सम्मेलन में शिक्षा, आरक्षण और सामाजिक न्याय पर मंथन
  • वक्ताओं ने असमानता के खिलाफ एकजुट संघर्ष का दिया आह्वान

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर भवन में आयोजित “समता अधिकार सम्मेलन” ने सामाजिक न्याय की बहस को नई धार दे दी. कार्यक्रम में जुटे वक्ताओं और प्रतिभागियों ने शिक्षा, आरक्षण और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाते हुए मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं जाहिर कीं. ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी / यूजीसी रेगुलेशन–समता आंदोलन, बक्सर के तत्वावधान में हुए इस आयोजन ने यह संकेत दिया कि समाज के विभिन्न वर्ग अब अपने अधिकारों को लेकर अधिक सजग और मुखर हो रहे हैं.


सम्मेलन की शुरुआत ज्योतिबा फुले, डॉ. भीमराव अंबेडकर और बी.पी. मंडल को याद करते हुए हुई. अध्यक्षता जनार्दन कुशवाहा ने की, जबकि संचालन विश्वा यादव ने किया. वक्ताओं ने कहा कि इन महापुरुषों के विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं और समानता की लड़ाई में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.

मुख्य वक्ता लेखक एवं पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मण यादव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में जाति आधारित भेदभाव आज भी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने शिक्षा के बढ़ते खर्च पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना कठिन होता जा रहा है. उन्होंने युवाओं, छात्रों और किसानों से अपील की कि वे सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं.

डुमरांव के पूर्व विधायक और इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुशवाहा ने नई शिक्षा नीति 2020 और प्रस्तावित यूजीसी रेगुलेशंस पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. उन्होंने बिहार में पारित 65 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग की और इसे सामाजिक बराबरी के लिए जरूरी बताया.

अगिआंव के पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन ने आर्थिक असमानता को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि एक तरफ बड़ी आबादी मुफ्त राशन पर निर्भर है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. उन्होंने निजीकरण को इस असमानता का बड़ा कारण बताते हुए सभी वर्गों से एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की.
सम्मेलन में ऐपवा नेत्री पूजा यादव ने महिला आरक्षण विधेयक में ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के लिए स्पष्ट कोटा सुनिश्चित करने की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि जब तक सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर नहीं मिलेगा, तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है.

इस अवसर पर रिसर्च स्कॉलर ज्ञानप्रकाश, पृथ्वी, केदार यादव सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे. कार्यक्रम में बक्सर जिला परिषद अध्यक्ष सरोज देवी समेत पंचायत प्रतिनिधि, छात्र-युवा और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे. अंत में सभी ने समता, न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया.