कहा कि वहां अब श्रद्धा से ज्यादा दिखावा और व्यावसायिकता नजर आने लगी है. लोग मंदिरों और घाटों पर भक्ति से ज्यादा सेल्फी लेने में व्यस्त हैं तथा फाइव स्टार सुविधाओं के बीच अध्यात्म पीछे छूटता जा रहा है.
- काशी-अयोध्या की तरह बक्सर को सिर्फ सेल्फी प्वाइंट न बनाया जाए
- कॉरिडोर से पहले 36 प्राचीन तीर्थों का पुनर्जीवन जरूरी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी बक्सर में प्रस्तावित ‘वामन कॉरिडोर’ को लेकर अब आध्यात्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है. एक तरफ लोग इसे बक्सर के पर्यटन और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रसिद्ध कथावाचक ने इस मॉडल पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे अध्यात्म और बाजारवाद के बीच की लड़ाई बताया है. उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं होना चाहिए जिससे बक्सर की आध्यात्मिक पहचान कमजोर पड़ जाए.
आचार्य कृष्णानन्द शास्त्री ने कहा कि वे कॉरिडोर निर्माण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन काशी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों का वर्तमान स्वरूप सबके सामने है. उन्होंने कहा कि वहां अब श्रद्धा से ज्यादा दिखावा और व्यावसायिकता नजर आने लगी है. लोग मंदिरों और घाटों पर भक्ति से ज्यादा सेल्फी लेने में व्यस्त हैं तथा फाइव स्टार सुविधाओं के बीच अध्यात्म पीछे छूटता जा रहा है. उनके अनुसार अगर बक्सर में भी सिर्फ चमक-दमक वाला मॉडल अपनाया गया, तो यहां आर्थिक लाभ तो होगा, लेकिन आध्यात्मिक वातावरण प्रभावित हो सकता है.
उन्होंने बक्सर की पौराणिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि चारों युगों की साक्षी रही है. सतयुग में इसे शंभू तपोवन, त्रेतायुग में भगवान वामन और भगवान श्रीराम की लीला स्थली, द्वापर में वेद गर्भापुरी तथा कलयुग में व्याघ्रसर के नाम से जाना गया. उन्होंने कहा कि बक्सर की पहचान किसी आधुनिक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि ऋषियों और तप की भूमि के रूप में रही है.
आचार्य जी ने सुझाव दिया कि बक्सर के 35 से 36 प्राचीन तीर्थ स्थलों का पहले संरक्षण और पुनर्जीवन होना चाहिए. सोम तीर्थ, वामन तीर्थ, विश्वामित्र हृद और पाताल तीर्थ जैसे स्थलों को विकसित कर वहां भगवानों और ऋषियों की कथाओं को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया जाए. उनका मानना है कि इससे आने वाले श्रद्धालु बक्सर की वास्तविक आध्यात्मिक शक्ति को महसूस कर सकेंगे.
उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पहले धर्म आता है और उसके बाद अर्थ. अगर धर्म मजबूत होगा तो वैध और सात्विक तरीके से आर्थिक समृद्धि अपने आप आएगी. उन्होंने तिरुपति बालाजी और वैष्णव देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां श्रद्धा के कारण ही समृद्धि आई है.
आचार्य कृष्णानन्द शास्त्री ने बक्सर विकास के लिए अपना “बक्सर मॉडल” भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि पहले 10 कोस क्षेत्र में फैले प्रमुख तीर्थों का नक्शा तैयार कर उन्हें व्यवस्थित किया जाए तथा इन सभी स्थलों को जोड़ने के लिए 20 से 30 फीट चौड़ी सड़कें बनाई जाएं. उनका मानना है कि ऐसा होने पर बक्सर में सिर्फ पर्यटक नहीं, बल्कि सच्चे श्रद्धालु आएंगे और यहां का आध्यात्मिक वातावरण भी सुरक्षित रहेगा.
वीडियो :






.png)











0 Comments