जगह-जगह बने गड्ढों और लगातार बढ़ते यातायात दबाव के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों से भारी वाहनों का परिचालन आम लोगों के जीवन और संपत्ति के लिए गंभीर खतरा बन चुका है.
- जिलाधिकारी को सौंपा गया आवेदन, रिहायशी क्षेत्रों से भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल रोक की मांग
- जाम, जर्जर पुलिया और बढ़ते हादसों के खतरे का हवाला देकर प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : ब्रह्मपुर और रघुनाथपुर के रिहायशी इलाकों से गुजर रहे ओवरलोड बालू लदे ट्रकों, डंपरों और हाईवा के खिलाफ लोगों की नाराजगी अब प्रशासन तक पहुंच गई है. सामाजिक कार्यकर्ता शैलेश कुमार ओझा ने जिलाधिकारी, बक्सर और मुख्यमंत्री सचिवालय के सहयोग पोर्टल पर विस्तृत आवेदन देकर इन भारी वाहनों के परिचालन पर तत्काल रोक लगाने या उनके लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित करने की मांग की है. साथ ही रघुनाथपुर-बगेन मार्ग स्थित जर्जर पुलिया की तकनीकी जांच कराकर उसकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की भी मांग की गई है.
आवेदन में कहा गया है कि प्रतिदिन सैकड़ों ओवरलोड वाहनों के आवागमन से सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. जगह-जगह बने गड्ढों और लगातार बढ़ते यातायात दबाव के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों से भारी वाहनों का परिचालन आम लोगों के जीवन और संपत्ति के लिए गंभीर खतरा बन चुका है.
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि इस मार्ग पर रोजाना भीषण जाम लगता है, जिससे रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों की ट्रेनें छूट जाती हैं और अस्पताल जाने वाली एंबुलेंस भी लंबे समय तक फंसी रहती हैं. शाम के समय बाजारों में जाम के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है, जबकि रघुनाथपुर से बगेन तक दर्जनों गांवों के लोगों का दैनिक आवागमन भी बाधित रहता है.
शैलेश कुमार ओझा ने आवेदन में रघुनाथपुर-बगेन मार्ग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप बनी पुलिया की जर्जर स्थिति पर भी चिंता जताई है. उनका कहना है कि पुलिया से लोहे की सरिया बाहर दिखाई दे रही है, जो किसी बड़े हादसे का संकेत हो सकता है. समय रहते तकनीकी जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
आवेदन में यह भी कहा गया है कि भारी वाहनों के कंपन से आसपास के मकानों में दरारें आने की आशंका बढ़ गई है. रातभर ट्रकों के शोर, धूल और ध्वनि प्रदूषण से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों तथा मरीजों को परेशानी हो रही है. विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और सड़क किनारे लगे बिजली के पोल एवं तार भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित होती है.
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अनुमंडलाधिकारी, डुमरांव द्वारा 10 जनवरी 2026 को इस मार्ग पर ट्रकों के परिचालन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया गया था, लेकिन उसका प्रभावी अनुपालन आज तक नहीं हो सका. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि परिचालन पूरी तरह बंद करना संभव नहीं हो तो कम से कम रात 10 बजे के बाद ही भारी वाहनों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाए.
शैलेश कुमार ओझा ने कहा कि यह केवल यातायात का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर जनहित का विषय है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई कर क्षेत्रवासियों को राहत दिलाएगा.





.png)








0 Comments