पूरे मामले में करीब 70 लाख रुपये तक की गड़बड़ी की चर्चा 20 सूत्री की बैठक में सामने आ चुकी है, जिस पर संसद सुधाकर सिंह जिलाधिकारी को निर्देश दिया था कि दोषियों पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए.
- उपस्थिति रजिस्टर खंगालने का आदेश, 3 दिन में मांगा पूरा रिकॉर्ड
- राजपुर और ब्रह्मपुर प्रखंड से तलब हुई रिपोर्ट, राशि वसूली और जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले में सफाई घोटाले की जांच अब और गहराती जा रही है. एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के बाद अब शिक्षा विभाग ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. ब्रह्मपुर के साथ ही राजपुर प्रखंड के विद्यालयों से सफाई कर्मियों की उपस्थिति और अनुपस्थिति का पूरा ब्यौरा तलब किया गया है.
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से जारी ताजा निर्देश में राजपुर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को आदेश दिया गया है कि हाउसकीपिंग एजेंसी R.S. Enterprises द्वारा प्रथम दिन के कार्य दिवस से 13 अप्रैल 2026 तक जिन सफाई कर्मियों को विद्यालयों में भेजा गया, उनका पूरा उपस्थिति और अनुपस्थिति विवरण साथ ही उनका नाम तथा पहचान के लिए आधार कार्ड की छाया प्रति के साथ उनके खाते में भेजी गई राशि का बैंक स्टेटमेंट की मांगी गई है. जिससे आगे की कार्रवाई एवं ब्याज सहित राशि वसूली की पूरी गणना तय होगी.
विभाग ने स्पष्ट किया है कि एजेंसी का एकरारनामा पहले ही रद्द किया जा चुका है, लेकिन उससे पहले किए गए कार्यों के एवज में वास्तविक भुगतान एवं राशि वसूली की गणना अभी बाकी है. इसी को लेकर अब विद्यालयों के उपस्थिति पंजी,अनुपस्थिति विवरणी एवं सफाई कर्मी का आधार कार्ड के साथ उनके खाते में भेजी गई राशि की सत्यापित प्रतियां मांगी गई हैं.
कर्मियों की संख्या तथा भुगतान की होगी गणना
सूत्रों की मानें तो यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने दिनों तक सफाई कार्य हुआ, कितने ग़ैर अनुपस्थिति विवरण के बग़ैर राशि का भुगतान वैध है एवं कितने कर्मियों को एजेंसी ने काम पर लगाया है. इससे यह भी तय किया जाएगा कि एजेंसी से कुल कितनी राशि की वसूली की जानी है. विभागीय सूत्रों के अनुसार आरएस एंटरप्राइज़ को कुल अब तक किए गए भुगतान पर राशि वसूली एवं विभागीय मुक़दमा की कार्यवाई निश्चित है.
सांसद ने दिया था प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश
गौरतलब है कि इससे पहले जांच में कई विद्यालयों में बिना कार्य के भुगतान की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और वसूली का आदेश जारी किया गया. वहीं इस पूरे मामले में करीब 70 लाख रुपये तक की गड़बड़ी की चर्चा 20 सूत्री की बैठक में सामने आ चुकी है, जिस पर संसद सुधाकर सिंह जिलाधिकारी को निर्देश दिया था कि दोषियों पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए.
जांच में अधिकारियों की भूमिका भी होगी उजागर
अब विभाग की यह नई कार्रवाई इस ओर इशारा कर रही है कि जांच केवल प्रारंभिक स्तर पर सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आरएस एंटरप्राइज़ को किए गए हर भुगतान और हर दस्तावेज की बारीकी से जांच की जाएगी. इससे न सिर्फ एजेंसी बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट होने की उम्मीद है.
फिलहाल इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि रिकॉर्ड जांच के बाद आखिर कितना बड़ा घोटाला सामने आता है और किस पर कार्रवाई की गाज गिरती है और कुल कितनी राशि की वसूली काली सूची में दर्ज आरएस एंटरप्राइज़ से की जाती है.






.png)











0 Comments