केंद्रीय कारा में खोला जाएगा पेट्रोल पंप, कैदी करेंगे संचालन ..

केंद्रीय कारा के दक्षिण दिशा में काफी खाली जगह है. साथ ही यह मुख्य सड़क से भी सटी हुई है. ऐसे में यह स्थान पेट्रोल पम्प के लिए उपयुक्त माना जा रहा है. इसी वजह से एचपीसीएल के द्वारा इस स्थल का चयन किया गया है.





                               

  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारियों ने किया स्थल का चयन, जल्द पूरी होंगी आवश्यक प्रक्रियाएं 
  • कारा व सुधार विभाग की अनूठी पहल, रोजगार की गारंटी के साथ ही उचित भुगतान की गारंटी मिलेगी

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : कारा एवं सुधार विभाग के द्वारा बक्सर केंद्रीय कारा परिसर में पेट्रोल पंप खोले जाने की तैयारियां तेज कर दी गई है. इसके पूर्व हिंदुस्तान पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) तथा भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के अधिकारियों के द्वारा परिसर का निरीक्षण किया गया था, जिसमें एसपीसीएल द्वारा सहमति दी जा चुकी है. ऐसे में जल्द ही प्रक्रियाएं शुरु की जाएंगी और जल्द ही कारा के बाहरी परिसर में पेट्रोल पंप का अधिष्ठापन और संचालन भी हो सकेगा.

बक्सर केंद्रीय कारा लगभग 80 एकड़ में फैला हुआ है. जिसमें ओपन जेल का परिसर भी शामिल है. केंद्रीय कारा के दक्षिण दिशा में काफी खाली जगह है. साथ ही यह मुख्य सड़क से भी सटी हुई है. ऐसे में यह स्थान पेट्रोल पम्प के लिए उपयुक्त माना जा रहा है. इसी वजह से एचपीसीएल के द्वारा इस स्थल का चयन किया गया है.

मुक्त कारागार के बंदी करेंगे कार्य, मिलेगी रोजगार और उचित भुगतान की गारंटी

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पेट्रोल पम्प का संचालन मुक्त कारागार के बंदियों के द्वारा होगा. फिलहाल ये बंदी काम की तलाश में नगर में जाते हैं और शाम को वापस लौटते हैं. कई बार काम नहीं मिलने की वजह से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. साथ ही उन्हें मिलने वाली मजदूरी भी निर्धारित नहीं होती. पेट्रोल पम्प खुल जाने के बाद लगभग डेढ़ दर्जन बंदियों को नियमित रोजगार की गारंटी के साथ ही उचित भुगतान की गारंटी मिल जाएगी. भविष्य में यह संख्या बढ़ भी सकती है.

जेल में ही प्रशिक्षित और आत्मनिर्भर बन रहे बंदी

कारा एवं सुधार विभाग के द्वारा बंदियों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए कई तरह के प्रयास किए जाते रहे हैं. बंदियों को जहां विभिन्न प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाए जाने की कोशिश की जाती है जिससे कि अपनी सजा पूरी करने के बाद वह समाज में पहुंचकर पुनः अपनी जिंदगी को बेहतर ढंग से चला पाते हैं. वहीं दूसरी तरफ वह जेल में ही विभिन्न वस्तुओं का निर्माण भी करते हैं. जिन्हें अन्य जेलों के बंदियों के उपयोग के लिए भेजा जाता है.

बंदियों के जीवन में आ रहा सकारात्मक बदलाव

पूर्व लोक अभियोजक तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में मित्र नंद गोपाल प्रसाद बताते हैं कि केंद्रीय कारा का इतिहास बहुत ही पुराना और समृद्धशाली रहा है. यहां स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ही जेपी आंदोलनकारी भी रह चुके हैं. पहले से ही यहां फांसी की रस्सी बनाई जाती रही है. अब बिहार सरकार के द्वारा बंदियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लाई जा रही हैं. निश्चित रूप से इसके काफी सकारात्मक परिणाम होंगे.

मुक्ति आउटलेट के माध्यम से जेल में बने उत्पादों की होती है बिक्री

हाल ही में कारा एवं सुधार विभाग की पहल पर बक्सर में मुक्ति आउटलेट की स्थापना की गई है जहां जेल में बनाए गए उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाते हैं. इन उत्पादों में मसालों, साबुन आदि की बिक्री होती है.

कहती हैं कारा अधीक्षक :

'केंद्रीय कारा परिसर में पेट्रोल पंप खोले जाने की योजना है. पेट्रोलियम कंपनी के अधिकारियों के द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया था. आगे वरीय अधिकारियों के निर्देश के आलोक में कार्य किया जाएगा' 

ज्ञानिता गौरव, कारा अधीक्षक, केंद्रीय कारा, बक्सर














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