लोकसभा-राज्यसभा के 146 विपक्षी सांसदों के निलंबन के खिलाफ बक्सर में इंडी गठबंधन का प्रदर्शन ..

लोकसभा व राज्यसभा के 146 सांसदों के निष्कासन के खिलाफ किला मैदान से समाहरणालय तक विरोध मार्च किया और बक्सर जिलाधिकारी के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को एक स्मार पत्र सौंपा, जिसमें संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनसे तत्काल अपेक्षित कदम उठाने की मांग की गई.








- बक्सर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा पत्र
- संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपेक्षित कदम उठाने की मांग
कहा - सभी सांसदों का निलंबन अविलंब वापस हो 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : इंडिया गठबंधन के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत शुक्रवार भाकपा-माले, राजद, जदयू, सीपीआई और सीपीआई (एम) ने संयुक्त रूप से लोकसभा व राज्यसभा के 146 सांसदों के निष्कासन के खिलाफ किला मैदान से समाहरणालय तक विरोध मार्च किया और बक्सर जिलाधिकारी के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को एक स्मार पत्र सौंपा, जिसमें संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनसे तत्काल अपेक्षित कदम उठाने की मांग की गई.

विरोध मार्च का नेतृत्व भाकपा-माले के डुमराँव विधायक डॉ०अजीत कुमार सिंह, राजद के जिला अध्यक्ष शेषनाथ सिंह, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष डॉ० मनोज पाण्डेय, जदयू के जिला अध्यक्ष अशोक यादव सीपीआई के जिला सचिव कामरेड बालक दास, सीपीआईएम के जिला सचिव तथा पूर्व संसद कामरेड तेजनारायण सिंह यादव ने किया.

प्रतिरोध सभा को भाकपा-माले के डुमराँव विधायक डॉ० अजीत कुमार सिंह, राजद के बबलू यादव, कांग्रेस के कामेश्वर पाण्डेय, जदयू से मोहन चौधरी, पूर्व सांसद तेजनारायण सिंह यादव सहित इंडी गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं ने संबोधित किया.

वक्ताओं ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार 146 सांसदों को बस इतनी सी बात पर निकाल बाहर कर दिया गया कि वे संसद में हुए अप्रिय धुआं बम कांड पर प्रधानमंत्री व गृहमंत्री से बयान चाह रहे थे. बयान देने की बजाए बेहद अलोकतांत्रिक तरीके से सभी सांसदों को बाहर का रास्ता दिखला दिया गया. मोदी सरकार की बढ़ती तानाशाही ने संसद की गरिमा को तार-तार कर दिया है. दोनों सदन के अध्यक्षों की भूमिका सरकार की तरफदारी वाली रही है. यह लोकतंत्र के लिए बेहद ही शर्मनाक है. मोदी सरकार देश की डेमोक्रेसी को मोदीक्रेसी में बदल देने का सपना देख रही है.

वक्ताओं ने आगे कहा कि राज्यसभा अध्यक्ष की एक सांसद द्वारा की गई मिमिक्री पर भाजपा राजनीति कर रही है और कह रही है कि इसके जरिए जाट समुदाय का अपमान किया गया है. लेकिन दूसरी ओर उसी जाट समुदाय से आने वाली महिला पहलवान साक्षी मलिक ने भाजपाइयों की बलात्कारी प्रवृत्ति से तंग आकर कुश्ती से सन्यास ले लिया. क्या यह जाट समुदाय और महिलाओं का अपमान नहीं है? पूरा देश भाजपा की लोकतंत्र और महिला विरोधी कार्रवाइयों को देख व समझ रहा है.

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कहा कि यह तानाशाही चलने वाली नहीं है. 2024 के लोकसभा चुनाव में इस तानाशाह सरकार को दिल्ली की गद्दी से उखाड़ फेंका जाएगा. विपक्ष मुक्त संसद और विरोध मुक्त सड़क के मंसूबे पालने वाली भाजपा को देश की जनता कभी कामयाब नहीं होने देगी. 

हमारी मांग है कि सभी निलंबित सांसदों का निलंबन अविलंब वापस लिया जाए. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को भी इसी प्रकार से संसद से बाहर कर दिया गया. भाजपा विरोधी सभी पार्टियां आज एकजुट हो रही हैं और देश को बचाने के लिए एक साथ चलने के लिए कृतसंकल्पित हैं.

विरोध मार्च में नीरज यादव, जगनारायण शर्मा, विरेन्द्र सिंह यादव, ओमप्रकश सिंह, संजय सिंह, गनेश सिंह, कन्हैया पासवान, राजद के सुनील कुमार सिंह, लालबाबू यादव, परशुराम तत्वा राजद के मीडिया  प्रभारी  हरेन्द्र कुमार सिंह, रविराज, राघवेंद्र उज्जैन, मोहन चौधरी, हिंगमणि चंदा श्रीवास्तव, पूजा कुमारी, ममता देवी, शशि राय, जवाहर लाल पासवान, राजद के प्रदेश महासचिव निर्मल सिंह  कुशवाहा, ददन पासवान, राजद प्रदेश महासचिव  प्रतिमा देवी, उमेश कुमार सिंह, अशोक गुप्ता, प्रेम खरवार, कामेश्वर पाण्डेय, भोला पाण्डेय, नागेंद्र सिंह, बजरंगी मिश्रा, इफ्तखार आलम, संजय सिंह, अशोक  प्रजापति, दुर्गावती देवी, रानी पासवान , बृजबिहारी सिंह, भुट्टो खान, जिला प्रधानमहासचिव  धनपति चौधरी, सत्येंद्र आज़ाद, ओमप्रकाश माली एवं  महागठबंधन के सैकड़ों कार्यकर्ता  शामिल हुए.






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