मरणोपरांत भी समाज के लिए मिसाल बने राम छबीला सिंह, इच्छानुसार शरीर का हुआ दान

मेडिकल रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में उनके इस योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. समिति ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे आगे आकर देहदान का संकल्प लें और मानवता की सेवा में अपनी भूमिका निभाएं.









                                           

- आदर्श इंटर कॉलेज गहमर के पूर्व प्राचार्य तथा राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित राम छबीला सिंह का हुआ निधन

- आज से चार वर्ष पूर्व देहदान का लिया था संकल्प 

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : देहदान एक महान संकल्प है, जो मृत्यु के बाद भी समाज की सेवा करने का अवसर देता है. बक्सर के पाण्डेय पट्टी निवासी, आदर्श इंटर कॉलेज गहमर के पूर्व प्राचार्य, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित, समाजसेवी एवं पूर्व विज्ञान प्राध्यापक स्वर्गीय राम छबीला सिंह ने यह अनुकरणीय संकल्प चार वर्ष पूर्व लिया था. उनके इस संकल्प को 31 मार्च को उनके निधन के बाद पूरा किया गया, जिससे उन्होंने मृत्यु के बाद भी समाज के लिए एक मिसाल कायम की.

स्वर्गीय राम छबीला सिंह का यह निर्णय मानवता के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाता है. उनकी इस अंतिम इच्छा को उनके भतीजे सुजीत कुमार ने पूरा करने का संकल्प लिया और समिति की अध्यक्ष एवं नगर परिषद् बक्सर की पूर्व चेयरमैन मीना सिंह को सूचित किया. इसके बाद मीना सिंह ने बिहार समिति को सूचना दी और दोनों समितियों के सहयोग से देहदान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया.

स्वर्गीय राम छबीला सिंह का संकल्प बना प्रेरणा

राम छबीला सिंह का यह कदम समाज के लिए प्रेरणा बन चुका है. उनके परिवार ने उनके संकल्प को निभाकर यह संदेश दिया कि मृत्यु के बाद भी किसी का शरीर मानवता की सेवा में काम आ सकता है.

उनके पार्थिव शरीर को एंबुलेंस द्वारा पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) ले जाया गया. वहां, एनाटॉमी विभाग को संपूर्ण शरीर सौंपा गया, जिससे मेडिकल छात्रों के लिए शोध और अध्ययन में सहायता मिल सके. IGIMS अस्पताल में दधीचि देहदान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, महासचिव पद्मश्री बीमल जैन, दीघा विधायक संजीव चौरसिया, निदेशक डॉ. बिंदे कुमार, अधीक्षक एवं सोटो के चेयरमैन डॉ. मनीष मंडल, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. अवनीश कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष प्रसाद, कोषाध्यक्ष प्रदीप चौरसिया सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे. बक्सर इकाई की अध्यक्ष मीना सिंह भी इस दौरान उपस्थित रहीं.

समाज के लिए प्रेरणादायक कदम

स्वर्गीय राम छबीला सिंह के देहदान को पीड़ित मानवता की सेवा के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है. इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों एवं मृतक के परिजनों ने इसे एक महान कार्य बताया. राम छबीला सिंह के भतीजे सुजीत कुमार और उनके सुपुत्र अमन कुमार की उपस्थिति में संपूर्ण प्रक्रिया संपन्न हुई. इस दौरान अस्पताल परिसर में उपस्थित सभी लोगों ने बैकुंठवासी आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की.


उनके निधन पर स्थानीय वार्ड पार्षद राहुल यादव समेत कई समाजसेवी उनके घर पहुंचे तथा उनके द्वारा लिए गए इस महान संकल्प की सराहना की.

समाज को संदेश

राम छबीला सिंह के इस महान कार्य से यह संदेश मिलता है कि मृत्यु के बाद भी कोई व्यक्ति समाज की सेवा कर सकता है. मेडिकल रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में उनके इस योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. समिति ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे आगे आकर देहदान का संकल्प लें और मानवता की सेवा में अपनी भूमिका निभाएं.

स्वर्गीय राम छबीला सिंह के इस प्रेरणादायक कदम से निश्चित रूप से कई लोग प्रोत्साहित होंगे और समाज में देहदान को लेकर एक नई सोच विकसित होगी.











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