चार माह से वेतन लंबित, चौसा थर्मल पावर प्लांट के मजदूरों का शांतिपूर्ण कार्य बहिष्कार ..

आश्वासन दिया गया था कि हर हाल में 10 जनवरी 2026 तक सभी लंबित वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा. लेकिन तय तिथि बीत जाने के बाद भी सायंकाल तक मजदूरों के खातों में वेतन नहीं पहुंचा.

दूसरों को संबोधित करते अमरनाथ पांडेय 






                                         



  • एसटीपीएल के अधीनस्थ ठेकेदार पर वादा तोड़ने का आरोप, तय तिथि तक भी नहीं हुआ भुगतान
  • इंटक ने दिया समर्थन, मजदूर कॉलोनियों में रहकर दर्ज कराएंगे विरोध

बक्सर टॉप न्यूज़बक्सर: जिले के चौसा स्थित सतलुज थर्मल पावर लिमिटेड (एसटीपीएल) में कार्यरत मजदूरों ने चार माह से वेतन लंबित रहने के विरोध में शांतिपूर्ण कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है. यह निर्णय शनिवार 10 जनवरी को अखौरीपुर गोला स्थित मजदूर कॉलोनी में आयोजित बैठक में लिया गया. बैठक की अध्यक्षता विद्युत मजदूर कांग्रेस (इंटक) के अध्यक्ष अमरनाथ पाण्डेय (पप्पू पाण्डेय) ने की. मजदूरों का कहना है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब सब्र का बांध टूट चुका है.

बैठक में मौजूद मजदूरों ने बताया कि एसटीपीएल के अधीनस्थ ठेकेदार पावर मेक (Power Mech) द्वारा पिछले चार महीनों से वेतन भुगतान नहीं किया गया है. मजदूरों के अनुसार 25 दिसंबर 2025 को एसटीपीएल के निर्देश पर ठेकेदार की ओर से यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि हर हाल में 10 जनवरी 2026 तक सभी लंबित वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा. लेकिन तय तिथि बीत जाने के बाद भी सायंकाल तक मजदूरों के खातों में वेतन नहीं पहुंचा, जिससे नाराजगी और आक्रोश बढ़ गया.

इस स्थिति को देखते हुए मजदूरों ने सर्वसम्मति से कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया. विद्युत मजदूर कांग्रेस (इंटक) ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए साफ किया कि यह बहिष्कार पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा. किसी प्रकार का धरना, प्रदर्शन, नारेबाजी या तोड़फोड़ नहीं की जाएगी. मजदूर अपने-अपने कॉलोनियों में रहकर बैठक करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे.

इंटक अध्यक्ष अमरनाथ पाण्डेय ने जिला प्रशासन से अपील की कि शांतिपूर्ण कार्य बहिष्कार के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या असामाजिक तत्वों की गतिविधि से मजदूरों को सुरक्षित रखा जाए. साथ ही उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर ठेकेदार के माध्यम से लंबित वेतन का अविलंब भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की.

उन्होंने कहा कि मजदूर पहले ही महंगाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे हैं. वेतन न मिलने से बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं. यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार प्रबंधन और कंपनी प्रशासन की होगी.







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