बताया कि उनकी चिंता तब और बढ़ गई जब उन्होंने यह देखा कि विश्वामित्र सेना का कार्यालय भी बंद हो चुका है. इससे यह आशंका गहरी हो गई है कि कहीं लोगों के पैसे लेकर संस्था को अचानक समेट तो नहीं दिया गया.
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| कलाकार को पुरस्कार देते राज कुमार चौबे |
- कार्यालय बंद, भुगतान बकाया और फोन बंद, राजनीति की तैयारी के बीच बढ़ा विवाद
- पूर्व पदाधिकारियों का खुला आरोप—धर्म नहीं, सत्ता लक्ष्य; प्राथमिकी की तैयारी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सनातन की आड़ में राजनीति में एंट्री की तैयारी कर रहे विश्वामित्र सेना के सुप्रीमो राजकुमार चौबे अब गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. आरोप लगाने वालों का कहना है कि जिस तरह सहारा, जेवीजी, हेलियस और पीएसीएल जैसी संस्थाओं ने भरोसा जीतकर लोगों को नुकसान पहुंचाया, उसी तर्ज पर बक्सर में भी सनातन के नाम पर सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश में आर्थिक अनियमितता की गई है. मामला अब जिले की राजनीति और सामाजिक हलकों में तीखी चर्चा का विषय बन चुका है.
अहिरौली निवासी मुनमुन चौबे, जो पहले विश्वामित्र सेना में पदाधिकारी रह चुके हैं, ने आरोप लगाया कि राजकुमार चौबे का मकसद सनातन की सेवा नहीं बल्कि राजनीति में अपनी एंट्री सुनिश्चित करना है. उन्होंने बताया कि उनकी चिंता तब और बढ़ गई जब उन्होंने यह देखा कि विश्वामित्र सेना का कार्यालय भी बंद हो चुका है. इससे यह आशंका गहरी हो गई है कि कहीं लोगों के पैसे लेकर संस्था को अचानक समेट तो नहीं दिया गया.
मुनमुन चौबे के अनुसार, बड़े-बड़े आयोजनों और हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा जैसे दावों के जरिए भीड़ तो जुटाई गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यक्रमों में लगे वाहन चालकों, टेंट, लाइट और साउंड सिस्टम संचालकों को आज तक भुगतान नहीं किया गया. पैसे मांगने पर पहले टालमटोल और अब पूरी तरह अनदेखी की जा रही है. ऐसे में अब कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी की जा रही है.
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| कभी यहीं हुआ करता था विश्वामित्र सेना का कार्यालय |
वहीं विश्वामित्र सेना के पूर्व शाहाबाद संयोजक राहुल पांडेय ने सीधे तौर पर इसे “धर्म की आड़ में सियासी प्रयोग” करार दिया. उन्होंने बताया कि उपाध्यायपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम का 27,000 रुपये, नेनुआ गांव के कार्यक्रम का 7,000 रुपये तथा गोलंबर सहित अन्य स्थानों पर हुए आयोजनों में टेंट, बाजा और वाहन देने वालों का भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब बकाया राशि की मांग की जाती है तो दुर्व्यवहार किया जाता है, जो पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है.
इस पूरे विवाद पर विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. ऐसे में उनका पक्ष सामने नहीं आ सका. फिलहाल यह मामला जिले में एक बड़े सवाल के रूप में खड़ा हो गया है कि क्या सनातन के नाम पर राजनीति की जमीन तैयार की जा रही थी और इसके लिए लोगों की जेब पर भार डाला गया. लोगों का कहना है कि बक्सर की जनता अब धर्म और राजनीति के इस अंतर को समझती है और ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाया जाना चाहिए.




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