आरोप है कि कांट मौजा के समीप स्थित जेके सीमेंट प्लांट के आसपास इस डैम को बिना सक्षम अनुमति के तोड़ दिया गया. इसके बाद से क्षेत्र में जल का अभाव गहराने लगा है.
- सिंचाई ठप होने से रबी-खरीफ फसल पर खतरा
- पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका, जांच की मांग तेज
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर क्षेत्र में नहर सफाई के नाम पर डैम तोड़े जाने का मामला सामने आने से किसानों, पशुपालकों और पर्यावरण पर गहरा संकट उत्पन्न हो गया है. इस घटना से सिंचाई व्यवस्था बाधित हो गई है और क्षेत्र में जल संकट की स्थिति बन गई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार मेहमडरा, कांट मौजा तथा भोजपुर जिले के सीकरीया से होकर बहने वाली नहर पर बने डैम वर्षों से स्थानीय किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख साधन रहे हैं. इन डैमों में जमा पानी से फसलों की सिंचाई होती थी, वहीं पशु-पक्षियों और वन्य जीवों के लिए भी यह जल स्रोत जीवनदायिनी भूमिका निभाता था.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कांट मौजा के समीप स्थित जेके सीमेंट प्लांट के आसपास इस डैम को बिना सक्षम अनुमति के तोड़ दिया गया. इसके बाद से क्षेत्र में जल का अभाव गहराने लगा है, जिससे किसानों की रबी फसल के साथ-साथ आगामी खरीफ फसल पर भी संकट मंडराने लगा है.
ग्रामीणों के अनुसार डैम टूटने से पशु-पक्षियों के लिए पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है, जिससे वन्य जीवों के गांवों की ओर रुख करने की आशंका बढ़ गई है. साथ ही भूजल स्तर में गिरावट की संभावना भी जताई जा रही है, जो भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन का कारण बन सकती है.
इस मामले को लेकर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि दक्षिण बिहार के जनसंवाद प्रमुख शैलेश कुमार ओझा ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किसकी अनुमति से इस महत्वपूर्ण जल संरचना को ध्वस्त किया गया.
उन्होंने दोषी व्यक्तियों और संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने, डैम के पुनर्निर्माण तथा जल संचयन व्यवस्था को जल्द बहाल करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने चेताया कि यह मामला केवल एक डैम के टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों किसानों की आजीविका, पर्यावरण संतुलन और क्षेत्रीय जल सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है, जिसे गंभीरता से लेना आवश्यक है.






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