आरोप है कि काम के बहाने विदेश ले जाकर इन्हें धोखाधड़ी कर फंसा दिया गया और अब उनकी रिहाई के नाम पर भारी रकम की मांग की जा रही है. मामले में तमाम प्रयासों के बावजूद गुरुवार तक स्वजनों के हाथ निराशा ही लगी है.

- दलाल के जरिए काम करने गए थे चारों युवक, महीनों से जेल में बंद होने का दावा
- रिहाई के लिए मांगे जा रहे लाखों रुपये, परिवारों की बढ़ी चिंता
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के कोरान सराय थाना क्षेत्र के कोरान सराय गांव के चार भारतीय मजदूर कंबोडिया में जेल में फंसे होने की खबर से उनके परिवारों में चिंता और बेचैनी का माहौल है. परिजनों ने इनकी रिहाई के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से न्याय की गुहार लगाई है. आरोप है कि काम के बहाने विदेश ले जाकर इन्हें धोखाधड़ी कर फंसा दिया गया और अब उनकी रिहाई के नाम पर भारी रकम की मांग की जा रही है. मामले में तमाम प्रयासों के बावजूद गुरुवार तक स्वजनों के हाथ निराशा ही लगी है.
मामले को लेकर कोरान सराय निवासी अखिलेश कुमार सिंह कुशवाहा ने विदेश मंत्रालय को आवेदन भेजकर अपने भाई समेत चार लोगों को न्याय दिलाने की मांग की है. आवेदन के अनुसार कोरान सराय निवासी गोविंद सिंह पिता सुखदेव सिंह, नावानगर थाना क्षेत्र के कड़सर गांव निवासी विनोद कुमार चौधरी पिता कृष्णानंद चौधरी, भोजपुर जिला के अगियांव थाना क्षेत्र के खननीकला गांव निवासी मनीष कुमार राम पिता रविंद्र राम तथा भोजपुर के तियर थाना क्षेत्र के अरेला गांव निवासी अमरजीत कुमार पिता हृदयानंद राम तीन जनवरी 2026 को एक साथ कंबोडिया काम करने के लिए गए थे. बताया गया कि वे किसी दलाल के माध्यम से वहां पहुंचे थे और उन्हें एक होटल में काम भी मिल गया था.
परिजनों का कहना है कि चारों मजदूरों के पास सभी वैध कागजात मौजूद थे और भारतीय नियमों के अनुसार उनकी कागजी प्रक्रिया भी पूरी थी. बावजूद इसके उन्हें किसी साजिश के तहत एक मामले में फंसा दिया गया और जेल भेज दिया गया. परिवार के अनुसार पिछले कई महीनों से उनसे सीधी बातचीत भी नहीं हो पा रही है.
बताया गया कि दो मार्च को आए एक फोन कॉल में जानकारी दी गई कि स्थानीय स्तर पर 2000 डॉलर की मांग की जा रही है. इसके बाद छह मार्च को भेजे गए संदेश में प्रति व्यक्ति लगभग पांच लाख रुपये देने की मांग की गई. इससे परिवार के लोगों की चिंता और बढ़ गई है. उनका कहना है कि जो युवक परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गए थे, आज उन्हीं के कारण परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
परिजनों ने बताया कि वे पिछले एक महीने से लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं. इस संबंध में बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह से भी मुलाकात कर मदद की गुहार लगाई गई थी. सांसद ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है और सभी साक्ष्यों के साथ जानकारी दी है कि ये लोग मानव तस्करी और जालसाजी करने वाले गिरोह के चंगुल में फंस गए हैं.
परिवार के लोगों का आरोप है कि इन युवकों को किसी आपराधिक गिरोह को बेच दिए जाने की आशंका है. उन्हें पर्याप्त भोजन भी नहीं दिया जा रहा है और मानसिक व शारीरिक दबाव में रखा जा रहा है. साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि उनसे जबरन अवैध कार्य कराए जा सकते हैं.
इधर परिवार के सदस्य लगातार भय और चिंता में जी रहे हैं. उनका कहना है कि अब तक विदेश मंत्रालय की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने से चिंता और बढ़ गई है. ऐसे में परिजनों ने एक बार फिर स्थानीय विधायक, प्रशासनिक अधिकारियों और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर चारों मजदूरों को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है.



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