कहा कि 1857 की क्रांति में बाबू कुंवर सिंह ने बिहार में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था. लगभग 80 वर्ष की उम्र में भी उनका जोश और जज्बा अद्भुत था. उन्होंने अपने नेतृत्व में एक मजबूत सैन्य शक्ति तैयार की और आरा में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध कर उन्हें पराजित किया.
- माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ मनाया गया विजयोत्सव, गूंजे देशभक्ति के नारे
- 1857 की क्रांति के नायक की गाथा सुन भावुक हुए लोग, साहस और बलिदान को किया याद
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : शहर के वीर कुंवर सिंह चौक पर गुरुवार को बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समिति की ओर से 1857 के महान योद्धा की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई. कार्यक्रम में लोगों ने एकजुट होकर उनके अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता जनार्दन राय ने की. इस दौरान चौक पर स्थापित वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और दीप जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. “वीर कुंवर सिंह अमर रहें” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा.
वक्ताओं ने कहा कि 1857 की क्रांति में बाबू कुंवर सिंह ने बिहार में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था. लगभग 80 वर्ष की उम्र में भी उनका जोश और जज्बा अद्भुत था. उन्होंने अपने नेतृत्व में एक मजबूत सैन्य शक्ति तैयार की और आरा में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध कर उन्हें पराजित किया.
उन्होंने आगे कहा कि बाबू वीर कुंवर सिंह का जीवन भारतीय शौर्य परंपरा का प्रेरणादायक इतिहास है, जो हमें विपरीत परिस्थितियों में भी साहस के साथ संघर्ष करना सिखाता है. 80 वर्ष की उम्र में अपनी घायल भुजा काटकर गंगा को अर्पित करने का उनका बलिदान आज भी देशभक्ति की सर्वोच्च मिसाल माना जाता है.
इस मौके पर सदर एसडीओ अविनाश कुमार, नगर थानाध्यक्ष मनोज सिंह, डॉ. श्रवण कुमार तिवारी, पुनीत सिंह, राजवंश सिंह, संत कुमार सिंह, सतीश त्रिपाठी, संध्या पांडेय, दिनेश सिंह, सुनील राम, संजय साह, विश्वामित्र सिंह, ओम जी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.






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