बक्सर में 21 बेटियों की गूंजी शहनाई, कल्लू संग पूरी रात झूमता रहा जन सैलाब..

इसी को ध्यान में रखते हुए सभी नवविवाहित जोड़ों को दीवान पलंग, कुर्सी-टेबल, पंखा, अलमारी, बड़ा बक्सा, कपड़े और दैनिक उपयोग का अन्य सामान उपहार स्वरूप प्रदान किया गया. 






                               


  • 30 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ बनी सामूहिक विवाह की गवाह
  • नवदंपत्तियों को उपहार में मिला गृहस्थी का पूरा सामान

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : ऐतिहासिक किला मैदान मंगलवार की रात सामाजिक समरसता, संस्कृति और उत्सव का अद्भुत केंद्र बन गया, जब ‘महर्षि विश्वामित्र सामूहिक विवाह महोत्सव’ के तहत 21 गरीब और जरूरतमंद बेटियों का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धूमधाम से संपन्न कराया गया. इस भव्य आयोजन को देखने के लिए करीब 30 हजार से अधिक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. पूरा मैदान शहनाई, मंगल गीत और तालियों की गूंज से देर रात तक गुलजार रहा.

आयोजन की भव्यता देखते ही बन रही थी. 21 जोड़ों के लिए अलग-अलग आकर्षक मंडप सजाए गए थे, जिन्हें रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से विशेष रूप से सजाया गया था. दूल्हों के लिए 21 लग्जरी गाड़ियों का काफिला निकाला गया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. जैसे ही बारात किला मैदान पहुंची, भोजपुरी स्टार अरविंद अकेला कल्लू बारातियों के साथ झूमते नजर आए. उनके पहुंचते ही माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया.

इस आयोजन का नेतृत्व समाजसेवी ओम जी यादव और उनकी टीम ने किया. विवाह समारोह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र बना रहा. मंच पर भोजपुरी कलाकार अरविंद अकेला कल्लू, आर्यन बाबू, शिवानी सिंह और अंशु राज ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर दर्शकों को रातभर बांधे रखा. कलाकारों के गीतों पर लोग देर रात तक झूमते रहे.

आयोजन समिति ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल विवाह कराना नहीं, बल्कि नवदंपत्तियों को सम्मानजनक गृहस्थ जीवन की शुरुआत देना भी है. इसी को ध्यान में रखते हुए सभी नवविवाहित जोड़ों को दीवान पलंग, कुर्सी-टेबल, पंखा, अलमारी, बड़ा बक्सा, कपड़े और दैनिक उपयोग का अन्य सामान उपहार स्वरूप प्रदान किया गया.

इस महोत्सव में समाज के हर वर्ग का सहयोग देखने को मिला. बक्सर की महिला ब्यूटीशियनों ने दुल्हनों को सजाने-संवारने की सेवा निःशुल्क दी, जबकि स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों ने पूरी व्यवस्था संभालकर आयोजन को सफल बनाया. आयोजन ने बक्सर में सामाजिक एकता और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है. हालांकि, अधिमास में मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाना कई विद्वानों ने निषिद्ध माना है.












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