मिसाल-बेमिसाल: रोजा रख रहे आसिफ ने खून देकर बचाई रीना की जान ..

रोजा में होने के बावजूद भी रक्त का महादान किया. लॉक डाउन के दौरान घर से निकल कर रेडक्रॉस के रक्त अधिकोष पहुँच कर उन्होंने उक्त महिला के लिए रक्तदान कर यह साबित कर दिया कि मानवता का धर्म सभी धर्मों से बढ़ कर है

- व्यवहार न्यायालय में कार्यरत हिन्दू अधिवक्ता की जान बचाने के लिए मुस्लिम युवक ने दिया खून
- लॉक डाउन की विषम परिस्थितियों में पेश की मानवता की मिसाल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: कोरोना संकट काल के दौरान फिलहाल देश में लॉक डाउन है. लोग ईश्वर से यही प्राथना कर रहे हैं कि, मानवता को इस संकट से बचाया जाए. इस परिस्थिति में कर कब किसे क्या जरूरत पड़ जाए, कुछ अंदाजा नही लगाया जा सकता. ऐसे में आज जाति धर्म की दीवार तोड़ते हुए कुछ लोग इंसानियत को बचाने में अपना योगदान दे रहे हैं. 

ऐसा ही एक उदाहरण उस वक्त सामने आया जब अंत्योदय सेवा संस्थान के गिट्टू तिवारी को यह सूचना मिली कि, बक्सर व्यवहार न्यायालय की एक महिला अधिवक्ता रीमा कुमारी जिनकी तबियत खराब होने के वजह से उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ उन्हें 1 यूनिट ब्लड की जरूरत थी.

ऐसे में बक्सर के रहने वाले आसिफ रजा नामक युवक को इस बात की जानकारी हुई और उन्होंने तत्काल गिट्टू तिवारी से संपर्क किया आसिफ ने  रोजा में होने के बावजूद भी रक्त का महादान किया. लॉक डाउन के दौरान घर से निकल कर रेडक्रॉस के रक्त अधिकोष पहुँच कर उन्होंने उक्त महिला के लिए रक्तदान कर यह साबित कर दिया कि मानवता का धर्म सभी धर्मों से बढ़ कर है.  संस्थान के गिट्टू तिवारी ने आसिफ का आभार जताते हुए कहा कि, देश में बनी हुई नफरत और घृणा की परिस्थितियों के बीच आसिफ ने वाकई इंसानियत का परिचय दिया.














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