100 कैदियों को स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है. बताया जा रहा है कि, केंद्रीय कारा के जर्जर भवनों के कारण इसकी क्षमता काफी कम हो गई है. कई भवनों का उपयोग नहीं हो रहा है. ऐसे में केवल 100 कैदियों को हटाया जाने से सोशल डिस्टेंसिंग का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा.
- क्षमता से अधिक कैदियों की संख्या को देखते हुए लिया गया निर्णय.
- कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के अनुपालन के लिए लिया गया फैसला.
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: जेल में कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से कारा एवं सुधार विभाग के महानिरीक्षक मिथिलेश मिश्रा के निर्देश के आलोक में बक्सर केंद्रीय कारा से तकरीबन सौ कैदियों को दूसरे जेलों में स्थानांतरित किए जाने की तैयारी की जा रही है. मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने एवं उससे बचाव हेतु सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कराए जाने हेतु उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर तमाम तरह के एहतियात बरते जा रहे हैं. महानिदेशक ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया है कि, अन्य कार्यों में यदि जगह की उपलब्धता कम हो तो दूसरे भवनों को भी आगामी 2 महीने के लिए कैदियों को रखने के लिए प्रयोग किया जा सकता है.
इसके पूर्व संक्रमण के प्रसार को लेकर पहले ही केंद्रीय कारा में आने वाले के कैदियों को 14 दिनों तक क्वॉरेंटाइन किए जाने के लिहाज से अलग भवन उपलब्ध कराए जाने की बात भी निर्देशित की गयी थी, जिसके आलोक में बक्सर केंद्रीय कारा में अंडा सेल नामक हाई सिक्योरिटी सेल का उपयोग किया जा रहा था. वहीं अब पूर्व के सजावार कैदियों को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने का निर्देश दिया गया है.
केवल 100 कैदियों को हटाए जाने से नहीं पूरा होगा सामाजिक दूरी का निर्देश:
जेल सूत्रों के मुताबिक, महानिदेशक के निर्देश के आलोक में 100 अन्य कैदियों को भी अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की पहल शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि, केंद्रीय कारा में जहां तकरीबन एक 1136 कैदियों की कुल क्षमता है वहीं, नए अंडा सेल में भी तकरीबन डेढ़ सौ कैदी रखे जा सकते हैं. हालांकि, कुछ भवनों के जर्जर स्थिति में पहुंचाने के बाद अब कैदियों की क्षमता केवल 700 के करीब रह गई है. हालांकि, विभागीय आंकड़े के मुताबिक 1136 को की कुल क्षमता माना जाता है ऐसे में 1223 कुल बंदियों में से लगभग 100 कैदियों को स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है. बताया जा रहा है कि, केंद्रीय कारा के जर्जर भवनों के कारण इसकी क्षमता काफी कम हो गई है. कई भवनों का उपयोग नहीं हो रहा है. ऐसे में केवल 100 कैदियों को हटाया जाने से सोशल डिस्टेंसिंग का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा.
वर्षों से बंद हैं कई कैदी भवन, जो बचे वह इस्तेमाल लायक नहीं:
बताया जा रहा है कि, वर्ष 2012 में केंद्रीय कारा के पैगंबर आश्रम भवन को बंद कर दिया गया. इस भवन में कुल 6 वार्ड थे. इसके बाद विवेकानंद एवं वाल्मीकि आश्रम के भी 2 वार्ड बंद कर दिए गए. उधर अब जो भवन इस्तेमाल किए जा रहे हैं मरम्मत एवं अनुरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे वह भी खस्ताहाल होते जा रहे हैं. बताया जाता है कि, खस्ताहाल जेल भवन में बंद कैदी मौसम की मार भी झेलते हैं. कई भवनों की टीन की शेड कभी गर्मी के मौसम में उन्हें तपाती है तो वहीं, बरसात के मौसम में टपकते हुए बारिश के पानी में रात गुजारना उनकी मजबूरी होती है. उधर जो भवन पक्के हैं उनमें पड़ी दरारें देखने के बाद कैदियों को केवल भगवान का ही नाम याद आता है.
कहते हैं अधिकारी:
सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन कराया जाने के उद्देश्य के मद्देनजर महानिदेशक से मिले निर्देशों के आलोक में सौ कैदियों को दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने की पहल की जा रही है. वहीं, बाहर से आए कैदियों की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें अन्य कैदियों से अलग रखे जाने के लिए नवनिर्मित हाई सिक्योरिटी सेल का इस्तेमाल किया जा रहा है.
सतीश कुमार सिंह,
कारा उपाधीक्षक,
केंद्रीय कारा









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