जर्जर अवस्था में पहुंच चुके केंद्रीय कारा के भवन का जल्द होगा कायाकल्प ..

जेल की मरम्मति एवं अनुरक्षण के लिए विभागीय निर्देश मिलने के बावजूद अभी तक कोई विशेष पहल नहीं की गई थी. लेकिन, कोरोना काल के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग आदि का अनुपालन कराए जाने के उद्देश्य से जेल के भवनों के कायाकल्प पर कारा विभाग ने चिंता जताई और भवन निर्माण विभाग के सहयोग से निर्माण कार्य सुनिश्चित कराया.

- दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रही है अंग्रेजों के जमाने की बनी जेल, सोशल डिस्टेंसिंग का नहीं हो पा रहा अनुपालन
- तीन चरणों में होगा निर्माण, कैदी भवन से लेकर कर्मियों के आवास तक की होगी मरम्मत

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: बेहद जर्जर अवस्था में पहुंच चुके केंद्रीय कारा के जर्जर भवन का जल्द ही कायाकल्प होना है. बताया जा रहा है कि, काफी लंबे इंतजार के बाद बाद भवन निर्माण विभाग द्वारा भवन निर्माण का कार्य शुरु किए जाने की बात सामने आ रही है. जल्द ही टेंडर आदि की प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा. बताया जा रहा है कि, केंद्रीय कारा में क्षमता अधिक कैदियों को रखा गया है. बताया जा रहा है कि, वर्ष 1880 में बनी इस जेल के कई भवन ऐसे हैं जो बेहद जर्जर अवस्था में चले जाने के कारण उपयोग में नहीं हैं. वहीं, जो भवन उपयोग में है वह भी अब बंद पड़े भवनों के जैसे ही खस्ताहाल हो गए हैं. 

ऐसे में कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना कभी भी सामने आ सकती है. वहीं, भवनों की कमी के कारण जेल में कैदियों को रखने की निर्धारित क्षमता में भी कमी आई है लेकिन, संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है. ऐसे में अब क्षमता से डेढ़ गुना ज्यादा कैदी जेल में बंद हैं. बताया जा रहा है कि, जेल की मरम्मति एवं अनुरक्षण के लिए विभागीय निर्देश मिलने के बावजूद अभी तक कोई विशेष पहल नहीं की गई थी. लेकिन, कोरोना काल के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग आदि का अनुपालन कराए जाने के उद्देश्य से जेल के भवनों के कायाकल्प पर कारा विभाग ने चिंता जताई और भवन निर्माण विभाग के सहयोग से निर्माण कार्य सुनिश्चित कराया.

बताया जा रहा है कि, जेल के भवनों की मरम्मति एवं अनुरक्षण का कार्य की तीन चरणों में पूरा किया जाएगा. प्रथम चरण बेहद जर्जर अवस्था में पहुंच चुके भवनों की मरम्मत की जाएगी तत्पश्चात जेलकर्मियों के भवनों की मरम्मति एवं अंत में जेल के बाहरी परिसर का कायाकल्प किया जाएगा.

जेल से कैदियों के भागने के बाद कारा प्रशासन ने लिया था संज्ञान भवन निर्माण विभाग में लटकाया मामला:

बताया जा रहा है कि, 30 दिसम्बर 2016 को जेल से पाँच कैदियों के भागने की घटना के पश्चात कारा विभाग के द्वारा जेल के भवन के मरम्मत एवं अनुरक्षण के संदर्भ में पहल की गई थी. जिसके बाद भवन निर्माण विभाग को 2 करोड़ 84 लाख रुपए की राशि आवंटित करते हुए मरम्मति एवं अनुरक्षण का जिम्मा दिया गया था. हालांकि, विभिन्न कारणों को बताते हुए अभी तक मरम्मति एवं अनुरक्षण का कार्य नहीं शुरू हो सका है. ऐसे में कारा भवन एक तरफ जहां पूरी तरह असुरक्षित हो गया है. वहीं, दूसरी तरफ कैदियों के भागने जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने की आशंका बनी हुई है. हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद एक बार फिर जग गई है.


वर्षों से बंद हैं कई कैदी भवन, जो बचे वह इस्तेमाल लायक नहीं:

बताया जा रहा है कि, वर्ष 2012 में केंद्रीय कारा के पैगंबर आश्रम भवन को बंद कर दिया गया. इस भवन में कुल 6 वार्ड थे. इसके बाद विवेकानंद एवं वाल्मीकि आश्रम के भी 2 वार्ड बंद कर दिए गए. उधर अब जो भवन इस्तेमाल किए जा रहे हैं मरम्मत एवं अनुरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे वह भी खस्ताहाल होते जा रहे हैं. बताया जाता है कि, खस्ताहाल जेल भवन में बंद कैदी मौसम की मार भी झेलते हैं. कई भवनों की टीन की शेड कभी गर्मी के मौसम में उन्हें तपाती है तो वहीं, बरसात के मौसम में टपकते हुए बारिश के पानी में रात गुजारना उनकी मजबूरी होती है. उधर जो भवन पक्के हैं उनमें पड़ी दरारें देखने के बाद कैदियों को केवल भगवान का ही नाम याद आता है.

क्षमता से डेढ़ गुना ज्यादा है कैदियों की संख्या, सुविधाएं नदारद:

केंद्रीय कारा में कैदियों को रखने की वर्तमान क्षमता तकरीबन 777 है. जेल में फिलहाल साढ़े 12 सौ कैदी बंद है. ऐसे में वार्डों में ठूंस-ठूंस कर कैदियों को रखना मजबूरी है. लिहाजा कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं में भी कमी आना लाजमी है. जेल सूत्र बताते हैं कि, शौचालय अथवा स्नानागार का प्रयोग करने के लिए कैदियों को लंबी लाइन लगानी पड़ती है.

सुरक्षाकर्मी भी नहीं है सुरक्षित:

जेल भवन के अंदर ही नहीं बल्कि बाहरी परिसर में बने भवनों के मरम्मति एवं अनुरक्षण का भी कार्य वर्षों से नहीं किया गया है. स्थिति यह है कि, जेल सुरक्षा कर्मियों के भवन भी बेहद ही खतरनाक स्थिति में है. तकरीबन डेढ़ वर्ष वर्ष पूर्व महिला सुरक्षाकर्मियों के आवास की दीवार गिर गई थी. जिसके बाद महिला पुलिसकर्मियों को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया लेकिन, उनके भवन का अनुरक्षण नहीं किया गया. बताया जा रहा है कि, बीएमपी बैरक की मरम्मति तकरीबन 1 वर्ष पूर्व कराई गई थी.लेकिन अभी भी वह इस अवस्था में नहीं है जिससे उसे पूर्णत: सुरक्षित कहा जा सके.

कहते हैं अधिकारी: 

जेल के भवनों की मरम्मत एवं अनुरक्षण के लिए वर्षों पूर्व कारा विभाग के द्वारा भवन निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया था. लेकिन अब तक इस संदर्भ में कोई पहल हुई थी. इसी बीच  भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने जानकारी दी है कि जल्द ही भवनों के कायाकल्प का कार्य शुरु होगा.

विजय कुमार अरोड़ा,
कारा अधीक्षक,
केंद्रीय कारा














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