वीडियो : सिय-पिय मिलन महोत्सव : विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ अयोध्या के राजकुमारों का विवाह, बक्सर में दिखा मिथिला का नज़ारा ..

अगहन शुक्ल पंचमी रविवार को सिय-रघुवीर विवाह सम्पन्न हो गया. विवाह के दौरान नया बाजार में अलौकिक दृश्य देखने को मिला. बारात में गुरु वशिष्ठ व राजा दशरथ तथा चारों भाई राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न हाथी-घोड़ों पर सवार हो राजा जनक के द्वार पहुंचते हैं. इस दौरान बारात में शामिल श्रद्धालुगण गाते-थिरकते नजर आए.







- विधि-विधान के साथ भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों का हुआ विवाह
- जनकपुर में दूल्हे सरकार से मां, बहनों, पिताजी व बाबा का नाम पूछ सखियों ने उड़ाया मजाक

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: नगर के नया बाजार स्थित श्री सीता विवाह महोत्सव आश्रम में आयोजित 10 दिवसीय 54 वें सिय-पिय मिलन महोत्सव में अगहन शुक्ल पंचमी रविवार को सिय-रघुवीर विवाह सम्पन्न हो गया. विवाह के दौरान नया बाजार में अलौकिक दृश्य देखने को मिला. बारात में गुरु वशिष्ठ व राजा दशरथ तथा चारों भाई राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न हाथी-घोड़ों पर सवार हो राजा जनक के द्वार पहुंचते हैं. इस दौरान बारात में शामिल श्रद्धालुगण गाते-थिरकते नजर आए.


महाराज जनक के द्वार पर द्वारपूजा की रस्म पूरी की गई. द्वार पूजा के बाद पुनः चारों भाई जनवासे में लौट गए. यह विवाह लीला की देखने के लिए दूर-दराज से कई श्रद्धालु देर रात तक आश्रम में मौजूद रहे. वह इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बन स्वयं की अभिभूत महसूस कर रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे बक्सर में मिथिला का नजारा दिख रहा हो.

द्वार पूजा के साथ हुआ विवाह का शुभारंभ : 

रात्रि नौ बजे द्वारपूजा के साथ आरम्भ हुए विवाह समारोह में दर्जनों महिलायें सजधज कर द्वारपूजन के लिए तैयार रही. इस दौरान उन्होंने पुष्प वर्षा की. महिलाएं नाचते-गाते हुए नजर आयी. वह सिर पर मंगल कलश लेकर चल रही थी. 


लोढ़े से हुआ सुकुमार दूल्हों का परीक्षण, सिया जी की सखियों ने उड़ाया मजाक : 

द्वार पूजा के बाद लौट कर जनवासे में विराजमान चारों दूल्हा सरकार पुनः विवाह की रस्म आगे बढ़ाने के लिए पालकी पर सवार होकर राजा जनक के द्वार पर पहुंचे जहां सिया जी की सखियों ने भगवान की आरती उतारी और लोढ़ा लेकर परीक्षण करने की विधि सम्पन्न कराई. इसके बाद पुनः चारों दूल्हा मंडप में आए और धानकुटन की विधि की गई. 

इस दौरान सखियां दुल्हों से मां, बहनों, पिता जी व बाबा का नाम पूछकर मजाक उड़ाती हैं और धानकुटन की विधि सम्पन्न कराती हैं. उधर, जनकपुर के चार लोग दूल्हों की मदद करने के लिए  मण्डप में आते हैं. साथ ही चारों दूल्हों को कच्चे धागे के बंधन से बांधने की विधि पूरी की जाती है.

कन्या परीक्षण विधि में सखियों के मज़ाक में फंस गए चुलबुलवा दूल्हा :

इसके बाद कन्या परीक्षण की विधि शुरु की जाती है, जिसमें सिया जी की सखियां चारों भाइयों के हाथों में आम का पल्लव देती हैं और अपनी दुल्हन के उपर डाल कर उन्हें पहचानने को कहती हैं. जिसमें तीन भाई तो अपनी दुल्हन को पहचान लेते हैं परंतु, लक्ष्मण जी के साथ सखियां मजाक कर देती हैं और दुल्हन के जगह पुरूष को बैठा देती हैं.

क्योंकि, लक्ष्मण सबसे ज्यादा चुलबुले दुल्हा हैं और स्वयं को सबसे चतुर दुल्हा मानते हैं. जैसे ही दुल्हन के रुप में मौजूद जनकपुर के पुरुष सामने आते हैं सभी सखियां ठठाकर हंसने लगती हैं. उधर, जो पुरुष दुल्हन का रूप धर कर बैठे हुए थे वह लक्ष्मण जी से अनुरोध करते हैं कि वह उन्हें भी अपने साथ अयोध्या ले चलें. बाद में लक्ष्मण जी को उनकी असली दुल्हन के दर्शन कराए जाते हैं.

महंत राजाराम शरण दास जी ने पूरी कराई विवाह की रस्में:

इसके बाद शुरु होती है विवाह की रस्म जिसमें चारों कन्याओं सीता, उर्मिला, मांडवी एवं श्रुतिकीर्ति की कन्यादान की रस्म महाराज जनक व उनकी पत्नी द्वारा पूरी कराई जाती है. राजा जनक और उनकी पत्नी बने व्यक्ति की आंखें कन्यादान के दौरान छलछला गई. कन्यादान के साथ ही लावा मिलाई की रस्म करवाई जाती है जिसमें आश्रम के महंत राजाराम शरण दास जी महाराज स्वयं इस रस्म को पूरा करवाते है.

मौजूद रहे साधु-संत व जनप्रतिनिधि, देर रात तक चला विवाह कार्यक्रम:

विवाह कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र देवाचार्य महाराज के साथ ही कई संत-महात्मा व गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे. महर्षि खाकी बाबा सरकार एवं श्रीमन्नारायण दास भक्तमाली "मामाजी महाराज" की प्रतिमाएं भी वहां पर स्थापित की गई थी. श्रद्धालु भक्त पूरी रात  विवाह मंडप से टस से मस नहीं हुए.

वीडियो : 







Post a Comment

0 Comments