वीडियो : जो औद्योगिक क्षेत्र के विकास की करेगा बात उद्यमी देंगे उसका साथ : संघ

बक्सर में ऐसा नहीं हो सका. जिसके कारण उद्यमी आज विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कोस रहे हैं. जब किस क्षेत्र का विकास होने से आर्थिक विकास एवं पर्याप्त संख्या में रोजगार के अवसर मिलेंगे.












- जिला उद्यमी संघ की बैठक के दौरान लिया गया निर्णय
- औद्योगिक क्षेत्र की खस्ता हालत को देखते हुए उठाई आवाज


बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर :  बक्सर औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्र का विकास नहीं किए जाने पर सरकार और विभाग को निशाने पर लिया है उनका कहना है कि 1975 में सांसद स्व एपी शर्मा की दूरदर्शी सोच के तहत इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से इसकी स्थापना हुई थी. प्रारंभिक काल में यहां शिक्षित युवाओं के द्वारा कई उद्योगों की स्थापना की गई, लेकिन कालांतर में वित्तीय संस्थाओं तथा बियाड़ा के सहयोग के कारण उद्यमी अपनी इकाइयों के संचालन और उत्पादन की निरंतरता को जारी नहीं रख पाए. ना तो जनप्रतिनिधि और ना ही विभाग के द्वारा कभी उद्योगों को पुनर्जीवन देने का प्रयास किया गया. आज औद्योगिक क्षेत्र की जमीन पर कोई भी बैंक ऋण देने को तैयार नहीं है. उद्यमी किसी तरह अपने उद्योगों का संचालन कर रहे हैं. इसके साथ ही पुराने उद्योगों के स्थान पर नए उद्योग स्थापित करने के आवेदन दिए जाने के वर्षों बीच जाने के बावजूद उन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है. स्थानीय सांसद और विधायक के समक्ष समस्याओं को रखा गया लेकिन उनकी उदासीनता और पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. ऐसे में अब उस प्रत्याशी को मतदान किया जाएगा जो उद्योगों की स्थिति सुधारने का वादा करेगा.

बक्सर उद्यमी संघ के अध्यक्ष बृज किशोर सिंह का कहना है कि बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार के द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए कई योजनाएं लाई गई लेकिन सरकार तथा विभाग के करिंदों की अदूरदर्शी सोच के कारण धरातल पर कोई भी योजना ढंग से लागू नहीं हो सकी. बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार के द्वारा यह भी कहा गया था कि जो उद्यमी अपने पुराने उद्योग को चलाने में सक्षम नहीं है वह यदि चाहे तो विभाग से अनुमति लेकर नए उद्योग शुरू कर सकते हैं किसी के तहत बक्सर के अतिरिक्त दूसरे जिलों के औद्योगिक क्षेत्र में कई उद्यमियों ने सफलतापूर्वक नए उद्योगों अथवा नए व्यवसाय की शुरुआत उद्योग विभाग की जमीन में की और आज बेहतर ढंग से उसका संचालन भी कर रहे हैं लेकिन बक्सर में ऐसा नहीं हो सका. जिसके कारण उद्यमी आज विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कोस रहे हैं. जब किस क्षेत्र का विकास होने से आर्थिक विकास एवं पर्याप्त संख्या में रोजगार के अवसर मिलेंगे.

सोडियम सिलिकेट निर्माण उद्योग चलाने वाले उद्यमी संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने बताया कि 2007 में जब उन्होंने आईटीआई खोला तो उसे समय उन्होंने उद्योग विभाग को पत्र लिखकर यह कहा की क्यूंकि सोडियम सल्फेट निर्माण में कोयले की कमी के कारण बाधा उत्पन्न हो रही है ऐसे में अब आईटीआई चलाने की अनुमति दी जाए. उद्योग विभाग ने पहले तो उन्हें कोई जवाब नहीं दिया लेकिन जब वर्ष 2011 में बढ़िया में औद्योगिक क्षेत्र में आईटीआई कॉलेज खुला तो उन्होंने पुणे विभाग में संपर्क किया ज्ञात हुआ कि नए नियमों के तहत अब आईटीआई अथवा कोई भी टेक्निकल इंस्टिट्यूट खोला जा सकता है उन्होंने पुनः पत्राचार किया तो वर्ष 2016 में उनसे पहले के बकाया 62 हज़ार 500 रुपये मांगे गए. पैसा चुका देने के बावजूद आज तक उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में आइटीआई संचालित करने की अनुमति नहीं मिली है.

ठीक इसी तरह फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्री "ओजेक्स" के संचालक मुन्ना ओझा ने बताया कि उन्होंने मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए अनुरोध किया लेकिन आवेदन दिए जाने के वर्षों भी जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई. 

उद्यमी कमलबास कुमार कश्यप का कहना है कि बिना किसी उचित कारण के कई उद्यमियों का उद्योग रद्द कर दिया गया. जबकि उद्यमियों का यह कहना है कि पुरानी तकनीक खत्म होने के कारण नए तरीके से उद्योगों की स्थापना जरूरी है लेकिन विभाग उनकी बात नहीं सुनता. उन्होंने उम्मीद जताई की निश्चय ही कभी ना कभी किसी जनप्रतिनिधि को उद्यमियों की हालत पर तरस आएगा और वह उद्योगों के पुनर्जीवन के लिए कोई पहल करेंगे.

उद्यमी संघ की बैठक के दौरान अध्यक्ष बृज किशोर सिंह के साथ-साथ कमलबास कुमार कश्यप, विश्राम द्विवेदी, मुन्ना ओझा, अशोक कुमार, संतोष कुमार, हरेंद्र सिंह, हरदेव सिंह, एसके सिंह आदि मौजूद रहे.

वीडियो : 1



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