वीडियो : महाशिवरात्रि के मौके पर पारंपरिक गायन : ढोलक-झाल की थाप पर झूमे शिव भक्त

बताया कि महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई. शिवलिंग का अभिषेक, दुग्ध स्नान और भस्म अर्पण किया गया. भक्ति भाव से ओतप्रोत श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की. प्रसाद वितरण भी किया गया.











                                           

  • महाशिवरात्रि पर सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़
  • शिवलिंग का रुद्राभिषेक, संध्या में गूंजे भजन और लोकगीत

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जिले के विभिन्न शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना श्रद्धा और उल्लास के साथ की गई. सदर प्रखंड के छोटका नुआंव पंचायत स्थित श्री सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. श्रद्धालु जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे. यह पूजा-अर्चना पूरे दिन अनवरत जारी रही. संध्या में विधि विधान से विशेष पूजा के उपरांत लोकगीत एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्तिरस में डूबकर भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया.

पौराणिक महत्व से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

स्थानीय निवासी विपिन कुमार राय ने बताया कि यह मंदिर बक्सर की प्रसिद्ध पंचकोसी परिक्रमा के चौथे पड़ाव, उद्यालक ऋषि के आश्रम में स्थित है. यह मंदिर त्रेता युग से ही प्रतिष्ठित है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम जब पंचकोसी यात्रा पर निकले थे, तब वे इस स्थल पर आए और यहां विधिपूर्वक भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी.

यहां स्थापित शिवलिंग के आकार में हर साल कुछ बढ़ोतरी देखने को मिलती है, जिसे श्रद्धालु अद्भुत मानते हैं. विपिन कुमार राय ने बताया कि इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण मंदिर आज भी उपेक्षित है.

यहीं हुआ था माता लक्ष्मी की बहन दरिद्रा का विवाह

युवा समाजसेवी अजय यादव ने बताया कि यह स्थल केवल शिव भक्ति से ही नहीं, बल्कि अन्य पौराणिक घटनाओं से भी जुड़ा हुआ है. मान्यता के अनुसार, उद्यालक ऋषि का विवाह माता लक्ष्मी की बहन दरिद्रा से इसी स्थान पर संपन्न हुआ था. यह मंदिर और इसका परिसर भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का गौरवशाली केंद्र रहा है.

उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में इस मंदिर का विशेष उल्लेख मिलता है, लेकिन दुर्भाग्यवश बहुत से लोग आज इसके महत्व से अनजान हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि इस ऐतिहासिक स्थल के विकास और इसे पर्यटन स्थल के रूप में प्रचारित करने की दिशा में उचित कदम उठाए जाएं.

विधिवत पूजा और भजन संध्या का आयोजन

मंदिर के महंत वशिष्ठ सिंह ने बताया कि महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई. शिवलिंग का अभिषेक, दुग्ध स्नान और भस्म अर्पण किया गया. भक्ति भाव से ओतप्रोत श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की. प्रसाद वितरण भी किया गया.

संध्या में विशेष पूजा के बाद लोकगीत एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में स्थानीय भजन मंडलियों ने शिव महिमा से जुड़े भजन और लोकगीत प्रस्तुत किए. "भोलेनाथ की जय" के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भजनों का आनंद लिया और नृत्य भी किया.

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह, सुविधाओं में कमी

महाशिवरात्रि के इस विशेष दिन पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया. बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचे और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की. हालांकि, कई श्रद्धालुओं ने इस स्थान पर व्याप्त अव्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त की.

श्रद्धालुओं का कहना था कि मंदिर का इतिहास और आध्यात्मिक महत्व अति विशिष्ट है, लेकिन इसकी देखरेख और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मार्ग सुविधाओं का अभाव, पेयजल की कमी और मंदिर परिसर में समुचित प्रबंधन न होने से कई श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.

श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की कि इस गौरवशाली धार्मिक स्थल को उचित सम्मान और आवश्यक सुविधाएं दी जाएं ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

महाशिवरात्रि के इस अवसर पर जिले भर के अन्य शिव मंदिरों में भी पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ. श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की.

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