रात की ठंड में बना सहारा : साबित खिदमत फाउंडेशन और मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय बक्सर ने बांटे सैकड़ों कम्बल ..

उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे कार्य आगे भी लगातार जारी रहेंगे. समाज के कमजोर वर्ग को राहत पहुंचाना संस्थान का उद्देश्य रहा है और आगे भी इस दिशा में अधिक प्रयास किए जाएंगे.


 




                                         




  • स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गरीबों व असहायों के बीच पहुंची मदद
  • डॉ. दिलशाद आलम ने कहा—नेकी का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : कड़ाके की ठंड के बीच बीती रात साबित खिदमत फाउंडेशन और मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय बक्सर की ओर से सैकड़ों जरूरतमंदों और राहगीरों के बीच कम्बल वितरित किए गए. हर वर्ष की तरह इस बार भी संस्था के सदस्यों ने आधी रात तक जागकर गरीबों को गर्म कपड़े और कम्बल उपलब्ध कराए. 10 दिसंबर को मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय का स्थापना दिवस होता है, और इसी अवसर पर संस्था ने सेवा अभियान को और व्यापक रूप दिया.

इस मौके पर साबित खिदमत फाउंडेशन के निदेशक एवं मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय के बिहार प्रदेश सचिव डॉ. दिलशाद आलम ने खुद जरूरतमंदों तक पहुंचकर कम्बल बांटे. उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे कार्य आगे भी लगातार जारी रहेंगे. समाज के कमजोर वर्ग को राहत पहुंचाना संस्थान का उद्देश्य रहा है और आगे भी इस दिशा में अधिक प्रयास किए जाएंगे.

कार्यक्रम में संस्थान से राहुल केसरी, नसीम अंसारी, अहमद रज़ा, सुनील, प्रमोद सहित कई सदस्य मौजूद थे. सभी ने मिलकर रातभर अलग-अलग स्थानों पर घूमकर जरूरतमंदों की पहचान की और उन्हें कम्बल उपलब्ध कराया. संस्था के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष वितरण का दायरा पिछले वर्षों की तुलना में और विस्तृत किया जा रहा है.

डॉ. आलम ने बताया कि पिछली बार कपड़ा बैंक की स्थापना कर कई असहाय परिवारों को वस्त्र उपलब्ध कराए गए थे. इस वर्ष भी कपड़ा बैंक की ओर से राहत वितरण का कार्यक्रम जारी रहेगा. उनका कहना है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाना ही संस्थान का मूल उद्देश्य है, जिसे पूरा करने की दिशा में टीम लगातार कार्य कर रही है.

समाज सेवा और मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में संस्था द्वारा चलाया गया यह अभियान लोगों के बीच सराहना का विषय बना हुआ है.











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