मानवाधिकार दिवस पर जजों का भव्य कैंडल मार्च. शहर में जगाई जागरूकता की लौ ..

कहा कि मानवाधिकार दिवस 2025 की थीम "हमारी रोजमर्रा की अनिवार्यताएं" है. यह याद दिलाता है कि मानवाधिकार केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का आवश्यक हिस्सा हैं. 





                                         




स्टेशन रोड से अंबेडकर चौक तक न्यायाधीशों का मार्च. मानवाधिकारों की थीम पर दिया मजबूत संदेश

कारा बंदियों के बीच भी चला जागरूकता अभियान. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने दिया व्यापक संदेश

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आज व्यवहार न्यायालय बक्सर के न्यायाधीशों, न्यायिक कर्मचारियों, अधिवक्ताओं तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम ने कैंडल मार्च निकालकर शहर में मानवाधिकार जागरूकता का संदेश दिया. बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर आयोजित यह मार्च भवन विधिक सेवा सदन से प्रारंभ होकर चीनी मिल, स्टेशन रोड होते हुए अंबेडकर चौक तक पहुंचा.

मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश–सह–अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार बक्सर हर्षित सिंह ने कहा कि मानवाधिकार दिवस 2025 की थीम "हमारी रोजमर्रा की अनिवार्यताएं" है. यह याद दिलाता है कि मानवाधिकार केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का आवश्यक हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि गलत सूचना, नफरत और झूठ के खिलाफ आवाज उठाना आज की महती जरूरत है ताकि मानवाधिकार संरक्षण के वैश्विक प्रयास और मजबूत हो सकें.

उन्होंने बताया कि 10 दिसंबर का दिन मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) को अपनाए जाने के सम्मान में चुना गया था. वर्ष 1950 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया. दुनिया भर में यह दिन भेदभाव, असमानता और मानव गरिमा की रक्षा की दिशा में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है.

इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बक्सर द्वारा मुक्त कारागार और केंद्रीय कारा मंडल बक्सर में भी विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. केंद्रीय कारा में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अवर न्यायाधीश–सह–सचिव नेहा दयाल ने मानवाधिकारों की वैश्विक घोषणा, उसके ऐतिहासिक महत्व और संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कई संगठन इस दिन को मनाकर मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए जनजागरूकता को बढ़ावा देते हैं. मौके पर कारा अधीक्षक ज्ञानिता गौरव तथा अन्य कारा कर्मी मौजूद थे.

कैंडल मार्च और जागरूकता कार्यक्रम में बक्सर के सभी कार्यरत न्यायाधीश शामिल रहे. इनमें प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार शुक्ला, सुदेश श्रीवास्तव, संजीत कुमार सिंह, अपर न्यायिक दंडाधिकारी भोला सिंह सहित कई न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे. साथ ही व्यवहार न्यायालय के कर्मचारी राजीव श्रीवास्तव, सुनील कुमार चक्रवर्ती, धनंजय तिवारी, अजय कुमार, संजय कुमार, कुंदेन्दु कुमार दूबे, संतोष कुमार द्विवेदी, दीपक गुप्ता, अमिताभ श्रीवास्तव, जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य, कार्यालय कर्मी दीपेश कुमार श्रीवास्तव, सुधीर कुमार, मनोज कुमार रवानी, सुनील कुमार, संजीव कुमार, मोहम्मद अकबर अली, पैनल अधिवक्ता अशोक कुमार पाठक, आनंद रंजना, स्थानीय बच्चे तथा विधि सेवक अविनाश कुमार, हरे राम, सरोज आदि मौजूद रहे.










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