वीडियो : सूंडनुमा नाक तथा विचित्र आंखों वाला शिशु जन्मा, दुर्लभ चिकित्सकीय संयोग या दिव्य संकेत?

नवजात की शारीरिक बनावट देखकर स्वास्थ्यकर्मी भी हैरान रह गए. उसके चेहरे पर नाक की जगह सूंडनुमा उभार दिखाई दे रहा था और दोनों आंखें एक-दूसरे के बेहद करीब थीं. यही कारण रहा कि थोड़े समय में शिशु सभी की चर्चा का विषय बन गया.






                                         





  • बच्चे को देखने उमड़ी भीड़, हायर सेंटर रेफर
  • बच्चे में जन्मजात विकृति "साइक्लोपिया" की आशंका

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के सिमरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को सूंडनुमा नाक तथा विचित्र आंखों वाला शिशु जन्म लेने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. जन्म की सूचना फैलते ही अस्पताल पर भीड़ इकट्ठी हो गई और नवजात को देखने की होड़ लग गई. लोग फोटो और वीडियो लेने की कोशिश करते रहे, जिसके कारण अस्पताल प्रशासन को भीड़ नियंत्रित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ा.

मिली जानकारी के अनुसार सिमरी प्रखंड निवासी रवि कुमार की पत्नी को सात माह की प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उन्हें सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे. डॉक्टरों की निगरानी में प्रसव कराया गया, जिसमें पुत्र का जन्म हुआ. लेकिन नवजात की शारीरिक बनावट देखकर स्वास्थ्यकर्मी भी हैरान रह गए. उसके चेहरे पर नाक की जगह सूंडनुमा उभार दिखाई दे रहा था और दोनों आंखें एक-दूसरे के बेहद करीब थीं. यही कारण रहा कि थोड़े समय में शिशु सभी की चर्चा का विषय बन गया.

जन्मजात विकृति "साइक्लोपिया" की आशंका

बक्सर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नमिता सिंह ने बताया कि नवजात को साइक्लोपिया (Cyclopia) नामक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विकृति होने की संभावना है. यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब गर्भ में भ्रूण के मस्तिष्क और चेहरे का समुचित विकास नहीं हो पाता. उन्होंने बताया, "इसमें आंखों के विकसित होने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है और दो आंखों की जगह एक ही आंख बनती है. वहीं नाक या तो विकसित नहीं होती या असामान्य स्थान पर बनती है. यह घातक जन्मजात दोष है और ऐसे बच्चों के जीवित रहने की संभावना बहुत कम होती है."

जेनेटिक और प्रसवपूर्व जांच पर विशेषज्ञों की चिंता

डॉक्टरों के अनुसार इस स्थिति के पीछे माता-पिता के जेनेटिक कारण, क्रोमोसोमल असामान्यता, हानिकारक दवाओं या संक्रमण का प्रभाव सहित कई वजहें हो सकती हैं. विशेषज्ञों ने यह भी चिंता जताई कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं द्वारा समय-समय पर प्रसवपूर्व जांच (Antenatal Checkup) न कराना भी ऐसी जटिलताओं को बढ़ाने वाला कारक है. डॉक्टरों ने कहा कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी के माध्यम से तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनका लाभ लेकर इस तरह की समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है.

बच्चे की स्थिति नाजुक, हायर सेंटर रेफर

प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को सूचना दी गई और नवजात को उन्नत चिकित्सा सुविधा के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया. चिकित्सकों के अनुसार विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही नवजात की वास्तविक स्थिति और आगे के उपचार की संभावनाओं का पता चलेगा.

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता, प्रसवपूर्व जांच और गर्भावस्था के दौरान पोषण की आवश्यकता को उजागर कर दिया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे नियमित जांच कराएं और किसी भी प्रकार की असामान्यता पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें.

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