हर माह लगभग 2000 लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन दिए जाते हैं. इनमें बड़ी संख्या बंदरों के काटने के मामलों की भी होती है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बंदरों के साथ-साथ आवारा कुत्तों का आतंक भी शहरवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है.
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| सदर अस्पताल में घूमता कुत्ता (फाइल इमेज) |
- सदर अस्पताल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में लागू होगा नया सुरक्षा प्लान, स्वास्थ्य उपाधीक्षक होंगी नोडल पदाधिकारी
- हर माह करीब 2000 लोगों को लग रहा एंटी रैबीज इंजेक्शन, सुरक्षा कर्मियों की भारी कमी बनी चुनौती
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को आवारा कुत्तों के खतरे से बचाने के लिए अब ठोस और संगठित रणनीति बनाई गई है. राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर बक्सर जिला के सदर अस्पताल सहित सभी सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे. इसके साथ ही एंटी रैबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई जाएगी. इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए स्वास्थ्य उपाधीक्षक डॉ नमिता सिंह को जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया गया है.
डॉ नमिता सिंह की देखरेख में अस्पताल परिसरों की नियमित सफाई, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आवारा कुत्तों को अस्पताल परिसर से बाहर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे. इस संबंध में उन्होंने बताया कि आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम सीमित होने के कारण व्यवहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं. इसे देखते हुए सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है और अस्पताल प्रबंधकों से भी सहयोग लिया जा रहा है.
सदर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर
डॉ नमिता सिंह ने बताया कि जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत अपर्याप्त है. अस्पताल की चार मंजिलों पर प्रत्येक तल पर चार सुरक्षा कर्मियों की आवश्यकता है. इसके अतिरिक्त शिशु गहन चिकित्सा केंद्र में चार सुरक्षाकर्मी तथा दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों पर भी चार-चार सुरक्षाकर्मियों की जरूरत है. इस प्रकार कुल 24 सुरक्षा कर्मियों की आवश्यकता होने के बावजूद वर्तमान में केवल 9 सुरक्षाकर्मी ही तैनात हैं. हालात को और गंभीर बनाते हुए चतुर्थ वर्गीय कर्मियों की संख्या भी महज तीन ही है. ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की ओर से सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है.
हर माह 2000 लोगों को लगाया जा रहा एंटी रैबीज इंजेक्शन
सिविल सर्जन डॉ शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने बताया कि जिले में हर माह लगभग 2000 लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन दिए जाते हैं. इनमें बड़ी संख्या बंदरों के काटने के मामलों की भी होती है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बंदरों के साथ-साथ आवारा कुत्तों का आतंक भी शहरवासियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. ऐसे में अस्पताल परिसरों में कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने का सरकार का यह निर्णय मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद कारगर साबित होगा.
नगर परिषद के सहयोग के बिना अधूरी है व्यवस्था
सदर अस्पताल प्रबंधक दुष्यंत कुमार सिंह ने कहा कि ठंड के मौसम में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. वहीं दूसरी ओर सदर अस्पताल परिसर में बंदरों की समस्या भी गंभीर बनी हुई है. इन दोनों ही मामलों में नगर परिषद का सहयोग अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने बताया कि नगर परिषद को इस संबंध में कई बार पत्राचार किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आई है. प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है.




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