बसपा नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी लाइन से हटकर कार्य करने वाले नेता या कार्यकर्ता के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी.
- अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में जिला अध्यक्ष ने लिया कड़ा फैसला
- पूर्व प्रत्याशी पर गिरी गाज, बक्सर की राजनीति में तेज हुई सरगर्मी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नववर्ष के पहले ही दिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है. प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर बसपा जिला अध्यक्ष महावीर यादव ने पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर दिया है. इस कार्रवाई में सदर विधानसभा से पूर्व प्रत्याशी अभिमन्यु सिंह कुशवाहा, पूर्व प्रदेश महासचिव जे.पी. यादव और वरिष्ठ नेता रमेश राजभर शामिल हैं.
जिला अध्यक्ष द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि निष्कासित नेताओं पर पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता फैलाने, गुटबाजी को बढ़ावा देने और अन्य राजनीतिक दलों से साठगांठ कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने जैसे गंभीर आरोप हैं. प्रदेश नेतृत्व ने इन गतिविधियों को पार्टी की विचारधारा, नीति और संगठनात्मक एकता के विरुद्ध मानते हुए कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया था, जिसके आलोक में यह निर्णय लिया गया.
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने और संगठन को कमजोर करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. बसपा नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में कहा है कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी लाइन से हटकर कार्य करने वाले नेता या कार्यकर्ता के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी.
बताया जा रहा है कि निष्कासित नेता अभिमन्यु सिंह कुशवाहा बसपा के बिहार प्रदेश महासचिव रह चुके हैं. इसके अलावा वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में वे बक्सर विधानसभा सीट से बसपा के प्रत्याशी भी थे. चुनाव में उन्हें 29,118 मत प्राप्त हुए थे और वे तीसरे स्थान पर रहे थे. ऐसे में पार्टी के एक प्रमुख चेहरे पर हुई इस कार्रवाई को संगठन के भीतर अनुशासन का कड़ा संदेश माना जा रहा है.
इधर, कार्रवाई के बाद निष्कासित नेता जे.पी. यादव ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि जिस वीडियो के आधार पर कार्रवाई की गई है, उसमें कई अन्य लोग भी शामिल हैं. उनका आरोप है कि कार्रवाई केवल अतिपिछड़ा वर्ग से जुड़े नेताओं पर ही क्यों की गई, यह समझ से परे है. उनके इस बयान के बाद यह मामला और अधिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है.
कुल मिलाकर, नववर्ष के मौके पर बसपा की इस सख्त कार्रवाई ने बक्सर जिले की सियासत को नई दिशा दे दी है. राजनीतिक जानकार इसे एक ओर संगठन को मजबूत करने की कवायद मान रहे हैं, तो दूसरी ओर इसे आगामी चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीतिक सख्ती के रूप में भी देखा जा रहा है.




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