कहा कि बक्सर में भी कार्य निष्पादन में भारी कोताही बरती जा रही है. उन्होंने दावा किया कि उनके संज्ञान में 10 से 15 ऐसे मामले हैं, जिन्हें जानबूझकर लटकाकर रखा गया है. उनका कहना है कि कई प्रकरणों में अंचलाधिकारी स्तर से कोई आपत्ति नहीं होने के बावजूद मामलों को खारिज कर दिया गया.
समय पर निष्पादन नहीं होने का अधिवक्ताओं का आरोप, 10 से 15 मामले लटकाने का दावा
डीसीएलआर का पलटवार, आंकड़ों के साथ कहा– आरोप निराधार, 850 मामलों का हो चुका निष्पादन
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले के डुमरांव में डीसीएलआर के खिलाफ अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब बक्सर सदर डीसीएलआर की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं. राजस्व मामलों के निष्पादन को लेकर अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच खुलकर टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है.
अधिवक्ता डॉ अश्विनी कुमार वर्मा ने डीसीएलआर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बक्सर में भी कार्य निष्पादन में भारी कोताही बरती जा रही है. उन्होंने दावा किया कि उनके संज्ञान में 10 से 15 ऐसे मामले हैं, जिन्हें जानबूझकर लटकाकर रखा गया है. उनका कहना है कि कई प्रकरणों में अंचलाधिकारी स्तर से कोई आपत्ति नहीं होने के बावजूद मामलों को खारिज कर दिया गया, जो नियमों और प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है.
डॉ वर्मा के अनुसार, भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है. वर्षों तक फैसला नहीं होने से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि जमीन विवादों को लेकर सामाजिक तनाव भी बढ़ता है. उन्होंने इस पूरी कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है.
वहीं, आरोपों पर डीसीएलआर शशिभूषण कुमार ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ जवाब दिया है. उन्होंने बताया कि 17 नवंबर 2024 को कार्यभार संभालने के बाद से उनकी प्राथमिकता लंबित मामलों के निष्पादन की रही है. उनके अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1200 नए मामले आए थे, जबकि पहले से 1500 मामले लंबित थे. इसके अतिरिक्त वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 600 नए मामले दर्ज हुए.
डीसीएलआर ने कहा कि वर्तमान में लंबित मामलों की संख्या लगभग 2200 है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 850 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य नहीं है और सभी मामलों का निपटारा नियमों के अनुसार किया जा रहा है.
इस पूरे प्रकरण के बाद बक्सर में डीसीएलआर कार्यालय की कार्यशैली को लेकर बहस तेज हो गई है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आरोपों और आंकड़ों के इस टकराव में आगे क्या रुख सामने आता है.




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