कथा के समापन पर विदाई गीत “मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा” की प्रस्तुति के साथ पूरा पंडाल भावुक हो उठा और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं.
- श्रीराम के चरित्र से जीवन जीने की कला का संदेश, संगीतमय कथा में भावुक हुए श्रद्धालु
- अंतिम दिन विदाई गीतों के साथ नम हुईं आंखें, बुधवार को पूर्णाहुति और भंडारा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : भगवान श्रीराम ने अपने संपूर्ण जीवन के माध्यम से मानवता को मर्यादा, धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की श्रेष्ठ कला सिखाई है. मनुष्य अपने विचारों और अनुभूतियों के अनुसार ही सुख-दुख का अनुभव करता है. यह विचार औद्योगिक क्षेत्र स्थित मां काली मंदिर की 23वीं स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन मंगलवार को कथावाचिका किशोरी प्रज्ञा पाण्डेय (श्रीधाम अयोध्या) ने व्यक्त किए.
कथावाचन के दौरान उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम वनवास के लिए गए, तब उन्हें अनेक कष्टदायक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने विपरीत हालातों में भी मंगल अनुभूति को अपनाया. वनवास काल में मां शबरी, तपस्वियों और ऋषि-मुनियों के सानिध्य से उन्होंने मानव कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण सीखें ग्रहण कीं. रामचरितमानस के माध्यम से श्रीराम यह संदेश देते हैं कि व्यक्ति स्वयं अपनी परिस्थिति का निर्माता होता है और चाहे तो प्रतिकूल हालातों में भी अनुकूलता ला सकता है.
उन्होंने बताया कि लक्ष्मण और माता सीता के साथ वन में रहते हुए भगवान श्रीराम ने धर्म की रक्षा की और लंका विजय के पश्चात रामराज्य की स्थापना कर अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान हुए. कथा के समापन पर विदाई गीत “मिलन आज तक था हमारा तुम्हारा” की प्रस्तुति के साथ पूरा पंडाल भावुक हो उठा और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं. व्यास पीठ से आशीर्वाद स्वीकार करते हुए कथावाचिका ने विदा ली.
इस संगीतमय श्रीराम कथा को सुनने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचे. भजन गायक रविंद्र तिवारी, तबला वादक दिनेश कुमार उर्फ भुवाली, नाल वादक उमाशंकर, बैंजो वादक छठू लाल लहरी, पैड वादक भोला जी रोहतास सहित अन्य कलाकारों का योगदान सराहनीय रहा. कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक किया गया.
आचार्य सत्येंद्र तिवारी उर्फ सोनू बाबा के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम का कथा समापन मंगलवार 13 जनवरी को हुआ, जबकि पूर्णाहुति एवं भंडारा बुधवार 14 जनवरी को संपन्न होगा. आयोजन को सफल बनाने में गुंजन पाण्डेय, अजीत गुप्ता, विनोद सिंह, आशीष सिंह उर्फ जट्टा सिंह, विनीत सिंह, धन्जी सिंह, अनिल तिवारी, मुन्ना सिंह, चूमन राय, सुनील कुमार सिंह, ललन मिश्रा, भानू बाबा, चंदन पाण्डेय, संतोष चौबे, सुशील राय सहित अन्य सहयोगियों की भूमिका उल्लेखनीय रही.




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