कहा कि जो चिकित्सक दिन-रात आम लोगों की सेवा में लगे रहते हैं, उनकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए. अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा का अभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
- सदर अस्पताल में बहिष्कार समाप्त, शुक्रवार से ओपीडी सामान्य
- 22 और 23 जनवरी को ठप रही थी ओपीडी सेवा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर
बक्सर सदर अस्पताल में सरकारी चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा ओपीडी बहिष्कार दूसरे दिन शुक्रवार को समाप्त हो गया. सुरक्षा को लेकर उठे विवाद और आंदोलन के बीच यह बहिष्कार जिलेभर में चर्चा का विषय बना रहा. बहिष्कार समाप्त होने के पीछे राजनीतिक प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की पहल अहम रही.
बताया जाता है कि सदर अस्पताल के बाहर 21 जनवरी की तड़के हुई घटना के विरोध में चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया था. इस दौरान सदर एसडीएम अविनाश कुमार ने स्वयं पहल करते हुए मामले को सुलझाने का प्रयास किया. वहीं पूर्व सदर विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी का प्रयास रंग लाया. उन्होंने डॉक्टरों और प्रशासन से वार्ता के बाद हड़ताल समाप्त होने की जानकारी दी.
पूर्व विधायक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी शुभम आर्य से बातचीत की और सदर अस्पताल परिसर में पुलिस पिकेट स्थापित करने का सुझाव रखा. उन्होंने कहा कि जो चिकित्सक दिन-रात आम लोगों की सेवा में लगे रहते हैं, उनकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए. अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा का अभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
इधर जदयू जिलाध्यक्ष अशोक सिंह, संजय सिंह, जितेंद्र सिंह समेत कुछ सामाजिक प्रतिनिधियों ने सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती से मुलाकात कर चिकित्सकों की सुरक्षा और अन्य मांगों पर चर्चा की. बैठक के बाद चिकित्सा संगठन के पदाधिकारियों ने सुरक्षा के आश्वासन के साथ ओपीडी सेवाएं पुनः शुरू करने का निर्णय लिया. इसके साथ ही शुक्रवार से सदर अस्पताल की ओपीडी सेवा सामान्य हो गई, जिससे मरीजों ने राहत की सांस ली.
चिकित्सक से दुर्व्यवहार के बाद लिया गया था ओपीडी बहिष्कार का निर्णय
बता दें कि सदर अस्पताल में मंगलवार की रात एक महिला की मृत्यु हो जाने के बाद आक्रोशित परिजनों ने जमकर हंगामा किया था. इस दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार की घटना भी सामने आई थी. इस घटना से जिलेभर के चिकित्सकों में भारी नाराजगी फैल गई थी. चिकित्सकों का कहना था कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से उनका मनोबल टूट रहा है और सुरक्षा के अभाव में काम करना मुश्किल हो गया है. इसी आक्रोश के बीच सभी चिकित्सकों ने एकजुट होकर 22 और 23 जनवरी को ओपीडी सेवा के बहिष्कार का निर्णय लिया था.




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