क्या शराब के नशे में वाहन जांच कर रहे थे ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय कुमार?

आरोप है कि मौके पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय कुमार ने खुलेआम प्रतिमाह 50 हजार रुपये की अवैध राशि की मांग करते हुए कहा कि यदि सड़क पर वाहन चलाना है तो पैसा देना ही पड़ेगा. 







                                         

  • अवैध वसूली, घूस मांग और धमकी का आरोप, अधिवक्ता ने कोर्ट में दर्ज कराया मुकदमा
  • पहले भी सेना के जवानों व बाइक सवारों से दुर्व्यवहार की हो चुकी हैं शिकायतें

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले में यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय कुमार पर शराब के नशे में सड़क पर वाहन जांच करने, अवैध वसूली, घूस की मांग और अधिवक्ताओं के साथ मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. इस मामले को लेकर कृतपुरा निवासी अधिवक्ता पवन कुमार राय ने उत्पाद न्यायालय, कोर्ट संख्या-1 में विधिवत मुकदमा दर्ज कराया है.

मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि 24 दिसंबर को दोपहर करीब एक बजे सिंडिकेट मोड़ के पास ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय कुमार अपने साथ दो-तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों के साथ वाहनों को बार-बार रोककर कथित रूप से अवैध वसूली कर रहे थे. इसी दौरान एक ट्रैक्टर चालक द्वारा इसकी सूचना दिए जाने पर अधिवक्ता पवन कुमार राय अपना न्यायालयीन कार्य छोड़कर अधिवक्ता राघव पांडे, अपने भाई राघवेंद्र राय एवं मदन राय के साथ मौके पर पहुंचे.
अधिवक्ता पवन कुमार राय का आरोप है कि मौके पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय कुमार ने खुलेआम प्रतिमाह 50 हजार रुपये की अवैध राशि की मांग करते हुए कहा कि यदि सड़क पर वाहन चलाना है तो पैसा देना ही पड़ेगा. जब इस अवैध मांग का विरोध किया गया तो उनके मुंह से शराब पीने की तेज दुर्गंध आ रही थी और वह नशे की हालत में प्रतीत हो रहे थे.

पीड़ित अधिवक्ता के अनुसार, नशे की हालत में ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और यह धमकी दी कि वकील होने के बावजूद हरिजन अत्याचार अधिनियम के तहत फंसा कर पूरा प्रैक्टिस बर्बाद कर देंगे. आरोप है कि इसके बाद संजय कुमार ने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर अधिवक्ता पवन कुमार राय, अधिवक्ता राघव पांडेय, राघवेंद्र राय एवं मदन राय के साथ हाथापाई की और जान से मरवाने की धमकी भी दी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैफिक इंस्पेक्टर संजय कुमार पर इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं. आम नागरिकों, बाइक सवारों और यहां तक कि सेना के जवानों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें कई बार सामने आ चुकी हैं. इन मामलों को लेकर वरीय पुलिस अधिकारियों से शिकायतें भी की गईं, लेकिन अब तक उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है, जिससे आम लोगों में नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है.

घटना के बाद अधिवक्ताओं और आम नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है. न्यायालय में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब सभी की नजरें पुलिस प्रशासन और वरीय अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. यदि लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला न केवल यातायात पुलिस की कार्यशैली, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है. फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत किए जाने की बात कही जा रही है.








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