शैक्षणिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले बिंद टोली क्षेत्र से निकलकर बिहार टॉप-10 में जगह बनाना पूजा की कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों का नतीजा है.
- जिले में छठा, अनुमंडल में पहला स्थान, संघर्ष के बीच चमकी पूजा की मेहनत
- संघर्ष भरे माहौल में पली-बढ़ी, फिर भी नहीं टूटा हौसला
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर: सीमित संसाधन और कठिन हालात किसी के हौसले को नहीं रोक सकते, यह साबित कर दिखाया है पुराना भोजपुर की बेटी पूजा कुमारी ने. गन्ना जूस बेचकर परिवार चलाने वाले पिता की इस बेटी ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में टॉप-10 में स्थान हासिल कर सबको चौंका दिया. जिले में उसे छठा और अनुमंडल में पहला स्थान मिला है.
पुराना भोजपुर निवासी पूजा कुमारी ने अभावों के बीच पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया. उसके पिता बीरबल चौधरी चौक पर गन्ने का जूस बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं. सुनने में परेशानी होने के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. आज पूजा की सफलता से परिवार में खुशियों का माहौल है.
दर्दनाक हादसे के बाद भी नहीं रुकी पढ़ाई
चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी पूजा के जीवन में कई मुश्किलें आईं. कुछ वर्ष पहले उसके छोटे भाई गौतम की डूबने से मौत हो गई थी, जिससे परिवार गहरे सदमे में चला गया था. लेकिन इस कठिन समय में भी पूजा ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई जारी रखी.
स्कूल बदला, लेकिन लक्ष्य नहीं
पूजा की प्रारंभिक शिक्षा संत जोसेफ हाई स्कूल से हुई. बाद में स्कूल की मान्यता समाप्त होने पर उसने उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पुराना भोजपुर में नामांकन लिया. यहीं से उसने दसवीं की परीक्षा पास कर अपनी मेहनत का लोहा मनवाया.
सेल्फ स्टडी बनी सफलता की कुंजी
पूजा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और खासकर शिक्षक जेपी कुमार को दिया. उसने बताया कि सोशल मीडिया से दूरी बनाकर उसने पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया. परीक्षा में उसे हिंदी में 96, संस्कृत में 90, गणित में 99, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान में 78-78 तथा अंग्रेजी में 85 अंक मिले.
बिंद टोली से उठकर टॉप-10 तक का सफर
शैक्षणिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले बिंद टोली क्षेत्र से निकलकर बिहार टॉप-10 में जगह बनाना पूजा की कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों का नतीजा है. उसकी सफलता ने पूरे इलाके को गर्व महसूस कराया है.
सिविल सेवा में जाकर समाज बदलने का सपना
पूजा कुमारी का लक्ष्य सिविल सर्विसेज में जाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है. उसकी यह सफलता न सिर्फ उसके परिवार, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गई है.






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