गंगा महाआरती : दीप, मंत्र और भक्ति स्वर से गूंजा घाट, श्रद्धालुओं ने महसूस की आध्यात्मिक ऊर्जा ..

गंगा तट पर उपस्थित श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य में डूबे नजर आए. हर ओर श्रद्धा और विश्वास का प्रवाह दिखाई दिया, मानो पूरा घाट एक आध्यात्मिक उत्सव में परिवर्तित हो गया हो. 


 





                               


  • रामरेखाघाट पर दिव्य आलोक, 22वें वर्ष में गंगा आरती ने रचा आस्था का अनुपम उत्सव
  • दो दशक पुरानी परंपरा बनी बक्सर की पहचान, प्रशासनिक सहभागिता से बढ़ी भव्यता

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर के ऐतिहासिक रामरेखाघाट पर 21 वर्षों से निरंतर चल रही गंगा आरती की परंपरा ने रविवार को 22वें वर्ष में प्रवेश करते ही अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण का सृजन किया. स्थापना दिवस के अवसर पर श्री गंगा आरती सेवा ट्रस्ट समिति द्वारा आयोजित भव्य और संगीतमय आरती ने पूरे घाट को दिव्यता के प्रकाश से भर दिया. कार्यक्रम में यजमान के रूप में डीएम साहिला और नगर परिषद की चेयरमैन कमरुन निशा ने विधिपूर्वक मां गंगा की पूजा-अर्चना कर आरती संपन्न की, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई.

संध्या ढलते ही रामरेखाघाट दीपों की सुनहरी रोशनी में नहा उठा. गूंजते मंत्र, बजती घंटियां और भक्ति गीतों की मधुर लय ने वातावरण को अलौकिक बना दिया. गंगा तट पर उपस्थित श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य में डूबे नजर आए. हर ओर श्रद्धा और विश्वास का प्रवाह दिखाई दिया, मानो पूरा घाट एक आध्यात्मिक उत्सव में परिवर्तित हो गया हो. विशेष तैयारियों के चलते आयोजन की भव्यता देखते ही बन रही थी.

ट्रस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष परमहंस पांडेय ने बताया कि इस आरती की शुरुआत 21 वर्ष पूर्व नेहनिधि साकेत वासी मामा जी के सानिध्य में हुई थी. उनके आशीर्वाद से प्रारंभ हुई यह परंपरा आज भी बिना रुके जारी है और बक्सर की धार्मिक पहचान बन चुकी है. उन्होंने कहा कि यह आरती केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र है, जो हर दिन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है.

सहभागिता ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा


इस विशेष अवसर पर जिले के कई प्रशासनिक एवं न्यायिक पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और अधिक बढ़ गई. नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक, रेड क्रॉस के सचिव डॉ. श्रवण कुमार तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी शांतिकांत पासवान, नगर परिषद के अधिकारी रवि कुमार, भाजपा नेता सौरभ कुमार तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता नियामतुल्लाह फरीदी, ओम जी यादव, पप्पू राय, धनजी सिंह, कपीन्द्र किशोर भारद्वाज, आशुतोष सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए.

परंपरा से बन रही सांस्कृतिक पहचान


रामरेखाघाट की यह गंगा आरती अब केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह बक्सर की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है. प्रतिदिन यहां उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह स्थल लोगों के लिए आस्था, शांति और एकता का केंद्र बन गया है. इस परंपरा को जीवित रखने में मुख्य पुजारी अमरनाथ पांडेय, धनन पांडेय और कपिल मुनि पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनके समर्पण से यह दिव्य परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है.













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