कहा कि लोक अदालत लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है. इसमें किसी भी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति से विवाद का समाधान होता है.
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| लोक अदालत का उद्घाटन करती जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब एवं जिलाधिकारी साहिला |
- नौ बेंचों में हुई सुनवाई, विभिन्न प्रकार के मामलों का समाधान
- 14 करोड़ 75 लाख 55 हजार 951 रुपये की समझौता राशि पर बनी सहमति
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में वर्ष 2026 की प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया. इस लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के कुल 1708 मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निपटारा किया गया. मामलों के निष्पादन के लिए कुल नौ बेंचों का गठन किया गया था. इस दौरान 14 करोड़ 75 लाख 55 हजार 951 रुपये की समझौता राशि से जुड़े वादों का भी समाधान कराया गया.
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष काजल झांब, प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार, डीएम साहिला, एसपी शुभम आर्या, जिला प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल, प्रवीण कुमार सिंह तथा अन्य मंचासीन पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के सचिव विन्देश्वरी पांडेय, व्यवहार न्यायालय के न्यायिक पदाधिकारी तथा कार्यालय कर्मी मौजूद रहे. कार्यक्रम का संचालन पैनल अधिवक्ता विष्णु दत्त द्विवेदी ने किया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला जज काजल झांब ने कहा कि लोक अदालत लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है. इसमें किसी भी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि आपसी सहमति से विवाद का समाधान होता है. उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति अपने मुकदमे का निपटारा सुलह-समझौते के आधार पर करना चाहता है, वह लोक अदालत के माध्यम से एक ही दिन में समाधान प्राप्त कर सकता है.
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को न्यायिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. कई बार लोग अपने मामलों को लेकर विभिन्न न्यायालयों में वर्षों तक भटकते रहते हैं. ऐसे में लोक अदालत उन्हें त्वरित समाधान का अवसर देती है. उन्होंने कहा कि लोक अदालत जनता की अदालत है, जहां दोनों पक्षों की सहमति से ही वादों का निपटारा किया जाता है और समझौते के आधार पर अवार्ड जारी किया जाता है.
इस लोक अदालत में बैंक से संबंधित 544 मामलों का निष्पादन किया गया, जिसमें 13 करोड़ 11 लाख 60 हजार 794 रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी. इसके अलावा यातायात से जुड़े 618, आपराधिक 165, विद्युत 265, वैवाहिक 13 तथा एनआई एक्ट के चार मामलों का भी निपटारा कराया गया.
विभिन्न बैंकों के रिकवरी से जुड़े 98 मामलों में भी समझौता हुआ, जिसमें कुल 1 करोड़ 12 लाख 81 हजार 51 रुपये की राशि पर सहमति बनी और हस्ताक्षर किए गए.
इस अवसर पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश उदय प्रताप सिंह, सुदेश कुमार श्रीवास्तव, संजीत कुमार सिंह, अमित कुमार शर्मा, सोनेलाल रजक, कमल कुमार, मानस कुमार वत्सल, अनुपमा सिंह, अवर न्यायाधीश भोला सिंह, महेश्वर नाथ पांडेय तथा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मान्वेंद्र सिंह सहित पैनल अधिवक्ता और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे.




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