चौसा में फिर गरमाई पावर प्लांट की लड़ाई, त्योहारों के बाद बड़े आंदोलन का ऐलान ..

19 मार्च तक समस्याओं के समाधान की समयसीमा तय की गई थी. इसमें स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने और प्लांट से हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण की प्रमुख मांग शामिल थी. तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है.







                                 



  • 20 मार्च को “काला दिवस” मनाकर जताया जाएगा विरोध
  • रोजगार और प्रदूषण मुद्दे पर मोर्चा सख्त, गेट बंद व चक्का जाम की दी चेतावनी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के चौसा थर्मल पावर प्लांट को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है. प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा ने कंपनी और प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि लंबित मांगों पर शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो त्योहारों के बाद बड़ा जनआंदोलन छेड़ा जाएगा. फिलहाल, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए आंदोलन की तिथि आगे बढ़ा दी गई है.

मोर्चा की ओर से बताया गया कि 02 मार्च को बनारपुर पंचायत भवन में हुई बैठक में 19 मार्च तक समस्याओं के समाधान की समयसीमा तय की गई थी. इसमें स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने और प्लांट से हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण की प्रमुख मांग शामिल थी. तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है.

हालांकि, चैत्र नवरात्रि और ईद जैसे महत्वपूर्ण पर्वों को देखते हुए तत्काल आंदोलन टाल दिया गया है. इसके बदले 20 मार्च को “काला दिवस” मनाने का निर्णय लिया गया है. इस दिन प्लांट प्रबंधन के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया जाएगा और पुराने घटनाक्रमों की याद दिलाई जाएगी.

मोर्चा ने वर्ष 2024 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान किसानों और ग्रामीणों के साथ हुए कथित अत्याचार आज भी लोगों के मन में गहरे हैं. इन मामलों में अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने से असंतोष लगातार बढ़ रहा है.

संगठन ने इसे अंतिम चेतावनी बताते हुए कहा है कि रामनवमी के बाद यदि मांगों पर अमल नहीं हुआ तो आंदोलन की नई तारीख घोषित कर दी जाएगी. ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, युवा और महिलाएं सड़कों पर उतरेंगी.

मोर्चा ने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो थर्मल पावर प्लांट के मुख्य गेट को अनिश्चितकालीन बंद किया जाएगा और प्रमुख सड़कों पर चक्का जाम किया जाएगा. संगठन का कहना है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी और प्रशासन की होगी.

अंत में मोर्चा ने बातचीत के जरिए समाधान की अपील जरूर की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब और इंतजार संभव नहीं है और मांगें पूरी नहीं होने पर व्यापक आंदोलन तय है.











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